हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(फिरोज अहमद) लक्सर। विश्व के तमाम देश पिछले करीब साल भर से कोरोनावायरस से जूझ रहे हैं। लंबे समय से इस महामारी की मार को झेलने के बाद अब जाकर कुछ उम्मीद इसलिए बन रही है, कि इसके बचाव के लिए टीके तैयार होकर सामने आ गए हैं। भारत के लिए यह बड़ी उपलब्धि है कि यहां के चिकित्सा विज्ञान के विशेषज्ञों ने काफी कम समय में टीका तैयार कर लिया है जिसके लिए वह बधाई के पात्र हैं। लेकिन एक निराशाजनक विडम्बनापूर्ण स्थिति भी देखने को मिल रही है की विभिन्न विपक्षी दल इस तरह एवं स्वार्थी राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए इस बड़ी उपलब्धि को धुंधलाने की कोशिश करने में जुटे हैं राजनीति निंदक एवं आलोचको को सब कुछ गलत ही गलत दिखाई देता है विरोध करने का मूलभूत उद्देश्य राजनीति लाभ बटोरने एवं भारतीय जनता पार्टी एवं उनकी सरकार को नीचा दिखाना है। जो एक आदर्श एवं स्वस्थ लोकतंत्र की सबसे बड़ी बांधा है वर्तमान में कुछ राजनीति दल ऐसे हो सकते हैं जो राजनीति लाभ के लिए अपनी नीति एवं मर्यादा को ताक पर रखते हैं लेकिन जनहित को नकार कर की जा रही है राजनीति ना केवल जनता के विश्वास को चलती है बल्कि हमारे चिकित्सा वैज्ञानिकों के मनोबल को कमजोर करती है लोगों की सुरक्षा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसके लिए विपक्ष का आवाज बुलंद करना भी वाजिब है। सरकार की नीतियां अगर सही से काम नहीं कर रही तो उस पर सवाल उठाना भी विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है लेकिन सवाल संदह व आलोचना सकारात्मक होनी चाहिए। यह देश के लिए गर्व की बात है कि हमारे वैज्ञानिकों के अथक श्रम और समर्पण से देश में बनी एक नहीं दो-दो कोरोना वैक्सीन को मान्यता मिल गई है जाहिर है महामारियो के इतिहास में यह एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि टीके के निर्माण में परीक्षणों के कई चक्र की वजह से आम तौर पर कई कई सवाल लग जाते हैं मगर इस बार महामारी की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जागरूकता से चिकित्सा वैज्ञानियो ने दिन-रात एक करके गंभीर चिंता से दो-चार देश एवं दुनिया को बड़ी राहत दी है। सरकार की तत्परता का ही परिणाम है कि इस माह बहुप्रतिक्षित टीकाकरण की शुरुआत होने जा रही है आमजन के जीवन पर मंडरा रहे खतरों से मुक्ति दिलाने के लिए हमारे देश में जो सकारात्मक परिस्थितियां निर्मित हुई हैं उनसे ना केवल देशवासियों ने बल्कि दुनिया ने प्रेरणा ली है। निराशा एवं खतरे की स्थितियों में देश ने मनोबल बनाए रखा हर तरीके से महामारी को परास्त करने में हौसलों का परिचय दिया और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं मोर्चा संभाले रखा। लोगों से दीपक जलवाए है और थालिया बजवाई वैक्सीन जल्दी बन कर सामने आए इसके लिए प्रोत्साहित किया लेकिन इन संघर्षपूर्ण स्थितियों में विपक्षी राजनीतिक दलों ने कोई उदाहरण प्रस्तुत किया हो ऐसा दिखाई नहीं देता बल्कि इन दलों ने और विशेषक कांग्रेस ने हर मोर्चे पर नकारात्मक राजनीति को ही प्रस्तुत किया। अब अगर इन दोनों वैक्सीन को लेकर कोई संदेह या सवाल है तो यह सवाल वैज्ञानिकों की तरफ से उठना चाहिए विपक्षी राजनेताओं की तरफ से नहीं अगर हमारे वैज्ञानिक कह रहे हैं कि यह दोनों टीके सुरक्षित हैं तो हमारे पास उन पर विश्वास करने की कोई वजह नहीं कुछ विपक्षी नेताओं का यह कहना है कि वह भाजपा के बनवाए टिको का भविष्य कार करेंगे उनके दिमागी दिवालियेपन के सिवा कुछ भी नहीं यह कैसी राजनीति है। यह कैसा विपक्ष की जिम्मेदारियों का प्रदर्शन है जिसमें अपनी राजनीतिक स्वार्थ की रोटियां सेकने के नाम पर जनता के हितों की उपेक्षा की जा रही है। केंद्र सरकार या भाजपा में कहीं शुभ उद्देश्य एवं जन हितों की कोई आहट भी नहीं होती है तो विपक्षी दलों एवं कांग्रेस में भूकंप आ जाता है मजे की बात तो यह है कि इन राजनेताओं एवं राजनीतिक दलों को केंद्र सरकार एवं भाजपा की एक भी विशेषता या अच्छाई दिखाई नहीं देती। स्वदेशी कोरोनावायरस इन पर चल रही इस तरह इन राजनीति हमारे वैज्ञानिकों का अपमान है उनके आत्मविश्वास को कमजोर करने का षड्यंत्र है। उजालो पर कालिख पोतने का प्रयास है इस दुष्प्रभाव को रोकने के लिए फिलहाल इतना ही प्रयास होगा कि देश के लोगों से पहले केंद्र सरकार एवं भाजपा के नेता स्वयं वैक्सीन लेकर टीकाकरण अभियान की शुरुआत करें। कोरोना संक्रमण काल की नाजुकता से हर कोई वाकिफ है यह सभी जानते हैं कि सरकार एक बड़ी चुनौती से जूझ रही है। भारत जैसी बड़ी आबादी वाले देश में सबको टीका लगाना है इतना आसान भी नहीं है। हालांकि यह टीकाकरण का बुनियादी ढांचा मौजूद है जो एक राहत की बात है हमने बड़े-बड़े टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक चलाएं हैं वैक्सीन के उत्पादक का हमारा अनुभव और क्षमता भी हमें कहीं देशों से बेहतर बनाता है। ऐसी स्थिति में सत्तापक्ष और विपक्ष का आपस में उलझना हमें कई मोर्चों पर पीछे धकेल सकता है। सरकार अपनी मंशा और मकसद को पारदर्शिता से जाहिर करें ताकि सरकारी तंत्र में लोगों का भरोसा बड़े विदेशी वैक्सीन को धूंधलाने के लिए किस तरह छल कपट का सहारा लेकर अफवाहों को हवा दी जा रही है। कभी वैक्सीन में सूअर का मांस होने की बात कही जाती है तो कभी इसे असुरक्षित घोषित किया जाता है जबसे वैक्सीन आने की आहट हुई है तभी से विभिन्न विपक्षी दलों की ओर से यह शरारत भरा दुष्प्रचार किया जा रहा है कि वैक्सीन तो भाजपा की है। बिहार विधानसभा के चुनाव से ही कोरोनावायरस इन पर संभावित राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा इसे भाजपा की वैक्सीन बताना इसी की कड़ी है। मतदाओ को प्रॉब्लम देने के लिए वैक्सीन की राजनीति करना जितना गलत था उसे खास पार्टी का टीका बताना उतना ही निंदनीय है। सविधान ने तमाम दलों को लोकतांत्रिक अधिकार दे रखे हैं पर विपक्ष का अति उत्साहित होकर नकारात्मक दृष्टिकोण से अपना यह दायित्व निभाना जन विरोधी भी हो सकता है क्या नमक की रोटी का स्वागत किया जा सकता है कुछ आटा तो नमक की रोटी भी काम की हो सकती है पर जिसमें कोरा नमक ही नमक हो, वह स्वीकार्य कैसे हो सकती है।
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