हरिद्वार की गूंज (24*7)

(रजत चौहान) हरिद्वार। हरिद्वार धर्मनगरी में 4 दिन पूर्व में एक ऐसी घटना घटी जिससे क्षेत्र में मातम छा गया, और घरों में कोहराम मच गया। मामला रेलवे क्रॉसिंग से जोड़ा था जहां चार युवकों की ट्रेन से कटकर मौत हो गयी थी। उसके बाद क्या था विधायकों से लेकर रेलवे व पुलिस अधिकारियों का जमावड़ा लगने लगा, पर क्या किसी ने सोचा जिस घर का चिराज बुझ गया हो उस पर क्या बीत रही होगी। ऐसी घटना कई बार घट चुकीं है, फिर भी रेलवे विभाग गहरी निंद्रा में सो रहा है। ऐसा ही ताजा मामला हरिद्वार क्षेत्रान्तर्गत ज्वालापुर कोतवाली सेक्टर-2 का है, जहां रेल पटरी के क्रॉसिंग से जुड़ा है। जहां लोग सुबह से लेकर रात तक रेल पटरी की क्रॉसिंग करते दिख जाते है। और सबसे बड़ी बात यह है कि यह लोग अधिकतर वो है जो सिडकुल कंपनियों में काम करते है। और जल्दी बाजी में अपनी जान को जोख़्म में डाल कर कंपनी से लेकर घर पहुँचने के लिए समय न लगे इस लिए रेल पटरी को क्रॉस करते है। इसमे कुछ बच्चे भी है जो सेक्टर-2 से शॉट कट के चक्र में रेल पटरी की क्रॉसिंग करते है, यह रस्ता सेक्टर-2 से अबदुत मंडल निकलता है। सोचने की बात यह है कि इतनी बड़ी लापरवाही किस की है, अगर कोई दुर्घटना घटती है तो क्या रेलवे विभाग की जिम्मेदारी होगी य प्रशासन की, य किसी बड़ी दुर्घटना होने का इंतजार कर रहे है। हरिद्वार धर्मनगरी में एक इतनी बड़ी घटना घट चुकी है लेकिन फिर भी रेलवे विभाग से लेकर प्रशासन कुम्भ करण की नींद से जाग नही रही है, आखिर कोई बड़ी दुर्घटना घटती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। सोचने कि बात यह है कि किसी भी अधिकारी ने रेलवे क्रॉसिंग से जुड़ा मामले की जानकारी अपने कर्मचारियों से नही ली, ओर ना ही अपने पद पर बैठे अधिकारियों ने स्वयं जाकर निरीक्षण भी नही किया होगा। हम यह इस लिए बोल रहे है जो मामला ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्रान्तर्गत सेक्टर-2 का प्रकाश में आया है, वो एक बहुत बड़ी दुर्घटना को संकेत दे रहा है। क्या ऐसी दुर्घटना को रुकने में रेलवे विभाग व प्रशासन कामयाब होगा य नही यह अपने आप मे एक बहुत बड़ा सवाल पैदा होता है।

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