हरिद्वार की गूंज (24*7)

(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। सिडकुल थाना क्षेत्र के रोशनाबाद और अन्नीकी गांव को जोड़ने वाले पुल का अस्तित्व बचाने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग हर साल पुल के नीचे कार्य करा रहा है।क्योंकि यह पुल खनन माफियाओं की भेंट चढ़ चुका है। रात दिन इस नदी से सैकड़ों बुग्गियां और ट्रैक्टर ट्रालीओं के द्वारा अवैध खनन को अंजाम दिया जाता है। खनन माफियाओं ने पुल निर्माण होने के बाद से ही लगातार उसके आस पास से अवैध खनन कर पुल की जड़ों को कमजोर किया है। जिस कारण पुल का एक पिलर नीचे को धस गया है और पुल का अस्तित्व खतरेे में पड़ गया। जिसको बचाने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा पुल के नीचे आरसीसी दीवार नुमा कार्य किया जा रहा है। जिससे बरसात में नदी से आने वाले पानी के तेज बाहों में फुल बचा रहे। लेकिन कहीं ना कहीं पुल के नीचे किया जाने वाला कार्य भ्रष्टाचारी का शिकार हो चुका है क्योंकि ठेकेदार पुल के नीचे आरसीसी दीवार में बड़ा साबुत पत्थर लगा रहा है। और सीमेंट, रेत व 40 एमएम रोटी से तैयार मिक्स मटेरियल से उसे ढका जा रहा है। हालांकि बड़े पत्थर को बीच से तोड़कर लगाया जाना था। जिससे उसकी पकड़ मजबूत हो सके। क्योंकि बड़े साबुत गोल पत्थर के मुकाबले सीमेंट में ज्यादा मजबूत पकड़ टूटे हुए पत्थर की होती है। लेकिन पत्थर को तोड़ा नहीं गया है। इतना ही नहीं कोर सेंट और डस्ट की जगह स्थानीय नदियों से निकाला गया बारीक रेत भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ऊपर से सीमेंट भी कम लगाया जा रहा है। ठेकेदार अपने स्वार्थ के कारण घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर रहा है। पहले प्रशासन की लापरवाही के कारण पुल अवैध खनन माफियाओं का शिकार हुआ और अब उसे बचाने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा कराये जा रहे निर्माण में लगने वाली धनराशि को बंदरबांट कर ठिकाने सिर लगाने का कार्य किया जा रहा है। क्योंकि पानी के तेज बहाव की मार घटिया सामग्री झेल नहीं पाएगी और वह पानी में बह जाएगी। फिर नए सिरे से पीडब्ल्यूडी द्वारा ठेकेदारों की मिलीभगत से नव निर्माण कराने की योजना तैयार की जाएगी और सरकारी धन का फिर से दुरुपयोग किया जाएगा। हालांकि पीडब्ल्यूडी इंजीनियर ने घटिया और बड़ा सबूत पत्थर लगाने के कार्यों को मांनको के अनुरूप बताया है। और कहा है कि साइड पर दो दो मेटो की देख देख में पुल के नीचे के कार्य को किया जा रहा है। आपको बता दें कि पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा घटिया सामग्री से कार्य कराने का मामला यह नया नहीं है। पीडब्ल्यूडी विभाग वह भ्रष्टाचारी का अड्डा है जहां ठेकेदारों से पहले ही कमीशन की बात कर ली जाती है। और सांठगांठ कर बड़े-बड़े टेंडर ठेकेदारों के नाम किए जाते हैं। महान तक कमीशन का कुछ हिस्सा टेंडर होने से पहले ही अधिकारियों की जेब तक पहुंच जाता है। और इस भ्रष्टाचारी में विभाग के उच्च अधिकारियों की भूमिका अहम होती है। उच्च अधिकारियों की रेख देख में ही ठेकेदारों से मिलीभगत कर विभाग में आए हुए बजट को ठिकाने सिर लगाने की योजना बनाई जाती है। मामला यहां तक ही सीमित नहीं है। पुल के नीचे चल रहे कार्य में अवैध तरीके से लाया गया बड़ा गोल पत्थर लगाया जा रहा है। जिसको स्थानीय खनन माफिया अंजाम दे रहे हैं। सिडकुल थाने क्षेत्र में पढ़ने वाली नदियों से बड़ी मात्रा में खनन माफिया गोल पत्थर उठाकर ठेकेदारों के चल रहे निर्माण कार्यों पर डाल रहें हैं। और आरबीएम भी बड़ी मात्रा में उठाया जा रहा है। लेकिन सिडकुल पुलिस प्रशासन गंभीर नहीं है। सिडकुल पुलिस प्रशासन की ढीली लचक का ही नतीजा है कि रोशनाबाद और अन्नेकी गांव को जोड़ने वाला पुल खनन माफियाओं की भेंट चढ़ा है। जिससे रात दिन सैकड़ों की संख्या में मुसाफिर सफर करते हैं। सिडकुल पुलिस बुग्गियों से खनन करने वाले लोगों पर तो शिकंजा कसती है लेकिन अवैध खनन के बड़े माफियाओं पर शिकंजा कसने में नाकाम है। क्योंकि बड़े खनन माफियाओं को सिडकुल पुलिस का श्रेय प्राप्त है। छुटमुट पर कार्रवाई कर सिडकुल पुलिस अपनी पीठ थपथपाती है। लेकिन क्षेत्र में मशहूर बड़े खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने में बिल्कुल नाकाम है। जो शाम ढलते ही नदियों में ट्रैक्टर ट्रालियों को उतार कर बड़ी मात्रा में रोशनाबाद पुल से होते हुए खनन के काले कारोबार को अंजाम दे रहे हैं।

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