हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(गगन शर्मा) हरिद्वार। समाज मे अपराध के नियंत्रण हेतु आपसी तालमेल का बड़ा महत्व देखा गया है। साथ ही समय समय पर देखा गया है किसी भी केस के खुलासे के लिये पुलिस पर कितना दबाव है या नही। उदाहरण के लिये हरिद्वार का शिवालिकनगर में 2 बुजुर्गों की उनके फ्लैट में निर्मम हत्या। इस केस में जब डी.जी अशोक कुमार को स्वयं आना पड़ा तो वह केस महत्वपूर्ण बन गया तब उस केस को हल करना पुलिस की नाक का सवाल बन गया था। उसके चंद दिनों बाद ही उस केस का खुलासा कर लिया जाता है। वर्तमान में रूड़की क्षेत्रांतर्गत सिविल लाइन कोतवाली का मामला है, जहां रुड़की के नंदा कॉलोनी में नंद किशोर के घर हुई लाखो की चोरी के बारे मे 12 दिन से भी ज्यादा समय बीतने के बाद भी पुलिस के पास हवा में लठ चलाने के अलावा कुछ नही। परिवार में हाहाकार मचा हुवा है, वर्षों से एक एक पैसा जोड़कर मेहनत से बनाए गहनों, नगदी को चोर घर से उठा ले गए। इस केस को हल करने के लिये पुलिस द्वारा परिवार पर दबाव भी बनाया गया। इसके पीछे जांच करना भी हो सकता है, मगर परिवार वालो का कहना है कि इस अनावश्यक दबाव बनाकर हो सकता है पुलिस चाहती हो परिवार डरकर केस के खुलासे के लिये उन पर भविष्य मे किसी द्वारा दबाव न बनाये। हालांकि कि शक करना पुलिस का काम है, मगर किसी भी केस के खुलासे के लिये टीम वर्क बहुत जरूरी होता है। देखना यह है कि पुलिस कुछ समय बाद इसे ठंडे बस्ते में डालती हैं या आपसी तालेमल, टीम वर्क, सूझबूझ से निकट भविष्य में इस केस के खुलासे के लिये मीडिया और एसएसपी हरिद्वार को आमंत्रित करती हैं।
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