हरिद्वार की गूंज (24*7)

(रजत चौहान) हरिद्वार। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हरिद्वार पहुँचे जहाँ उन्होंने भारत माता मंदिर एवम समन्वय सेवा ट्रस्ट के परमाध्यक्ष ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज की समाधि स्थल पर बनने वाले समाधि मंदिर का शिलान्यास और सद्गुरु देव स्मृति भवन का लोकार्पण किया। इस दौरान उनके साथ आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी महाराज, योगगुरू बाबा रामदेव, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक समेत कई साधु संत भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ब्रह्मलीन संत सत्यमित्रानंद महाराज को महान संत बताया और कहा कि सनातन धर्म मे शंकराचार्य सबसे बड़ा पद होता है और उन्होंने माँ गँगा के लिए इस पद को भी छोड़ दिया। वही योगगुरु बाबा रामदेव ने भी सत्यमित्रानंद महाराज को युगपुरुष बताते कहा कि महाराज श्री ने आधी से ज्यादा दुनिया मे योग, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति परचम लहराया और 20 साल पहले जब वो हरिद्वार आये थे तो उन्हें सत्यमित्रानंद महाराज का ही सानिध्य प्राप्त हुआ था। और उनका अंतिम उद्बोधन भी पतंजलि योगपीठ में हुआ था। आज दोपहर बाद महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद की समाधि का शिलान्यास एंकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आज वैदिक विधि विधान के साथ भारत माता मंदिर के संस्थापक देश के उच्च कोटि के संत महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज की समाधि मंदिर का शिलान्यास किया और सत्यमित्रानंद सद्गुरु स्मृति सभागार  का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद देश के उच्च कोटि के संत थे। उनके देश निर्माण के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता उन्होंने भारतीय धर्म संस्कृति का प्रचार देश विदेश में किया। इस अवसर पर स्वामी रामदेव ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद स्वयं में एक संस्था थे कार्यक्रम की अध्यक्षता जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने की और संचालन भारत माता मंदिर ट्रस्ट के सचिन आई डी शर्मा ने किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रुप में बोलते हुए श्री राम जन्मभूमि मंदिर के ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महामंडलेश्वर गोविंद देव महाराज ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज ने भारत की आध्यात्मिक चेतना को पुनः जीवित करने का कार्य किया उनके अध्यात्म के क्षेत्र में योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है इस अवसर पर महंत ललिता नंद गिरी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ  कृष्ण गोपाल ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी सतपाल ब्रह्मचारी स्वामी हरि चेतनानंद आदि ने विचार रखे।

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