हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। वैश्विक महामारी कोविड-19 ने जिस तरह से दुनिया भर में आम जनजीवन को प्रभावित किया है। तीज त्योहार भी उससे बचे नहीं हैं। भीड़ और चहल-पहल जिन त्योहारों की रौनक हुआ करती थी। कोरोना काल में वो कब बीत गए पता ही नहीं चला। रमजान से लेकर इर्द और बकरीद तक तो इधर नवरात्र से लेकर बैसाखी, गुरू पूर्णिमा, सावन और श्रीकृष्ण जयंती आदि भी बेहद सादगी से बीते। गम का महीना मुहर्रम भी इसी सादगी और कोरोना प्रतिबंधों के साथ बीत रहा है। इमामबाड़े, इमाम चौक और अखाड़े वीरान हैं। न जुलूस निकले और न ही अखाड़े खेले गए हैं। और न ही अखाड़ों की फन ए सिपहगिरी देखने को मिल रही है। सड़कों से हजारों लाखों की भीड़ वाले जुलूस नदारद हैं। सरकार ने संक्रमण का फैलाव रोकने के लिये गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसके तहत पाबंदियों के साथ मुहर्रम का महीना बीत रहा है। घरों में मजलिस और इमाम हुसैन को याद कर मुहरर्म का एहतमाम बेहद सादगी से किया जा रहा है। वही हरिद्वार जिले के धनपुरा, सुल्तानपुर, बसेड़ी खादर, बहादरपुर, मंगलौर, कलियर, सलेमपुर, बहादराबाद आदि कस्बों शहर और गांव आदि में मुहर्रम बहुत बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। वही ज्वालापुर, गढ़ मीरपुर, मंगलोर में भी मुहरर्म के मौके पर बड़े जुलूस और अखाड़े व ऐतिहासिक ताजिया निकलते हैं, मेला भी लगता है। लेकिन इस बार कोरोना के कारण सभी धार्मिक कार्यक्रम प्रतिबंध के बीच गुजरे। वही ज्वालापुर से मोहम्मद दानिश शाह, उवेश अंसारी ने कहां कि मुहर्रम में जिस तरह का सूनापन देखने को मिल रहा है ऐसा कभी नहीं रहा। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये शासन प्रशासन की ओर से कुछ पाबंदियों की गाइडलाइन का पालन कराया जा रहा है । फुरकान अंसारी, वरिष्ठ छायाकार फकीरा खान का कहना है कि कोरोना महामारी का फैलाव रोकने के लिये सरकार और प्रशासन की ओर से बचाव के लिये कुछ गाइडलाइंस और पाबंदियां सभी धार्मिक आयोजनों पर लगाई गई हैं। उनका पालन जरूरी है। मुहर्रम का एहतमाम भी इसी गाइडलाइन के साथ सादगी के तरीके से हो रहा है।



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