हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग के संस्थापक प्रो० ईश्वर भारद्वाज 39 वर्ष के बाद योग विधा में विश्वविद्यालय को सुर्खियों में पहुंचाकर आज हमारे बीच से सेवानिवृत हुए। प्रो० भारद्वाज ने देश ओर दुनिया में योग को विश्वविद्यालयीय शिक्षा के रूप में स्थापित किया। योग शिक्षा के विख्यात व धुरंधर योग शिक्षाविद का जीवन योग की समरसता के साथ ही गुजरा। देश में ही नहीं पूरे विश्व में योग विज्ञान के क्षेत्र में वटवृक्ष की शाखाओं की तरह उनके शिष्य फैले हुए है। गुरु शिष्य परंपरा के प्रतीक आज तक बने रहे प्रो० ईश्वर भारद्वाज। योग गुरु बाबा रामदेव ने प्रो० ईश्वर भारद्वाज के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त होने पर वीडियों के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति दी। पतंजलि बहुत अच्छा काम योग पर कर रहा है, मगर गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय पिछले 35 सालों से योग को विश्वविद्यालय की शिक्षा के रूप में पतंजली से पहले स्थापित कर चुका है। इसके श्रेयकार प्रो० ईश्वर भारद्वाज है। योग में पदमश्री से नवाजे गए भारत भूषण ने कहा कि यदि आपको एक अच्छा दोस्त ढूंढना है तो आप गुरुकुल विभाग के प्रो० ईश्वर भारद्वाज से प्रेरणा लें। योग एक समन्वय शब्द है और उस शब्द का प्रयाय प्रो० ईश्वर भारद्वाज है।पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने 30 साल पूर्व तीन सखाओं रामदेव, बालकृष्ण और कर्मवीर की मुलाकात प्रो० ईश्वर भारद्वाज से हुई थी। उस समय प्रो० ईश्वर भारद्वाज गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में योग का प्रमाण-पत्र और पी०जी० डिप्लोमा को चलाते थे। उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० सुनील जोशी ने कहा कि प्रो० ईश्वर भारद्वाज से जब मेरी मुलाकात हुई उस समय गुरुकुल में योग विभाग खुलने की चर्चा थी। आज योग विभाग वटवृक्ष बन चुका है। और उस वटवृक्ष की टहनियां पूरे विश्व में फैलती जा रही है। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के योग संकायाध्यक्ष प्रो० सुरेश वर्णवाल, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के डा० लक्ष्मी नारायण जोशी, पी०जी० कालेज ऋषिकेश के योग विभागाध्यक्ष डा० जयप्रकाश कंसवाल ने अपने जीवन के प्रो० ईश्वर भारद्वाज से सम्बन्धित संस्मरण याद कर उनके सुखद जीवन की कामना की। प्रो० भारद्वाज के सम्मान में देश ही नहीं अपितु विश्व से शुभकामनाएं एवं सम्मान एव बधाई पत्र प्राप्त हुए है। योग गुरु डा० सुरक्षित गोस्वामी, पदम श्री भारत भूषण, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डा० चिन्मय पण्डया, डा० राजीव रस्तोगी, डा० भानुप्रकाश जोशी आदि ने भी वीडियों सन्देश द्वारा अपनी मंगलकामनाएं प्रेषित की। योग विभाग के सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने प्रो० भारद्वाज का सम्मान किया। प्रो० ईश्वर भारद्वाज के साथ अपने लम्बे कार्यकाल को सभी ने एक सुख अनुभव के रूप में याद किया। भारत विकास परिषद की ओर से प्रो० ईश्वर भारद्वाज को ‘‘फादर आफ योग एजुकेशन’’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। साथ ही उत्तराखण्ड व अन्य प्रान्तों के लगभग आठ संस्थाओं ने प्रो० भारद्वाज को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। डा० राकेश गिरी ने भी इस अवसर पर अपनी मंगल कामनाएं दी। कार्यक्रम का संचालन डा० उधम सिंह ने किया तथा डा० सुरेन्द्र कुमार ने कार्यक्रम का मार्गदर्शन किया। योग एवं शारीरिक शिक्षा संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो० आर०के०एस०डागर ने भी प्रो0 ईश्वर भारद्वाज के साथ अपने संस्मरणों को याद किया। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो० विनोद कुमार शर्मा, कुलसचिव प्रो० दिनेशचन्द्र भट्ट एवं परीक्षा नियंत्रक प्रो० एम०आर० वर्मा ने प्रो० भारद्वाज से जुड़े संस्मरण याद कर उनके जीवन के सुखद होने की कामना की। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय और बहुत से शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने प्रो० ईश्वर भारद्वाज को शुभकामनायें दी।



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