हरिद्वार की गूंज (24*7)

(रजत चौहान) हरिद्वार। इस समय कोरोना काल ने लोगो की कमर तोड़ कर रख दी है। और रोज की दिहाड़ी मजदूरी करने वालो के तो मानो खाने के लाले पड़ गए है, ओर ऊपर यह चालान कटने के बाद मानो की सड़क पर गाड़ी चालान भी दुश्वार हो गया हो। जी हां हम बात कर रहे है हरिद्वार धर्मनगरी की जहां पुलिस ने चप्पे-चप्पे पर लोगो के चालान काटने शुरू किए हुए है। और कम से कम चालान की फीस 100 रुपये रखी है, पर क्या ऐसी महामारी में पुलिस का खाली चालान काटना ही उचित है, अवैध शराब की बिक्री पूरी चरम सीमा पर चल रही है इन्हें रोकने का दायित्व किसका है। जी हां हरिद्वार धर्मनगरी में इस समय अगर कोई चांदी काट रहा है तो वो सिर्फ शराब माफिया है, हरिद्वार, ब्रह्मपुरी, देवपुरा, रानीपुर, शिवलोक कॉलोनी, भगत सिंह चौक, कनखल, खन्ना नगर और ज्वालापुर जिसमें रेलवे चौकी क्षेत्र मशहूर है। ऐसे पता नही कितनी जगह है जहां अवैध शराब ने अपने पैर पसार रखे है। ओर इस सब धंधे की जानकारी पुलिस को भी है, फिर भी पुलिस जानबूझकर अनजान बनी हुई है। जब एक बाइक चलाने वाले का चालान 1000 से 30000 हजार तक कट सकता है तो क्या अवैध शराब बेचने वालों का चालान क्यों नही कट सकता। ओर तो ओर शराब माफियाओं ने एक ओर अवैध शराब बेचने का धंधा मनाया हुआ है, होम डिलीवरी जी हां होम डिलीवरी, शराब माफिया का नेटर्वक इतना पावर फुल है कि फोन आते ही अवैध शराब की बिक्री जोरो से शुरू हो जाती है। अब आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हो कि अवैध शराब बेचने वालों के हौसले कितने बुलंद है। उनकी रगों में पुलिस का भी ख़ौफ़ खत्म हो गया है। ओर जहां चाहे, जैसे चाहे अपने इस अवैध शराब के धंधे को अंजाम दे रहें है। आपको बता दें कि अवैध शराब बेचने वाले मुनाफा के चक्कर में शराब दुकान से ज्यादा मात्रा में शराब खरीद कर दुगुने कीमत में बेचते है, जिससे शराब पीने वालों को सरकारी शराब दुकान के खुलने का इंतजार नही करना पड़ता है, और बड़ी आसानी से शराब उपलब्ध हो जाती है, देशी शराब एक पाव 90 से 100 रुपये तक और इंग्लिश शराब 150 से 200 रुपये तक बेचा जाता है। आज की युवा पीढ़ी भी इस अवैध शराब की पकड़ में है, आखिर हरिद्वार क्षेत्र की पॉश कॉलोनियों में कौन बिकवा रहा है अवैध शराब, किस की संरक्षण में बिक रही है अवैध शराब, क्या पुलिस के हाथ पहुच पाएंगे य खाली पुलिस छोटे-छोटे अवैध शराब की बिक्री करने वालो को पकड़ कर अपनी पीठ थपथपाने का काम करती रहेगी। आखिर कब तक अवैध शराब पर अंकुश लगेगा, यह भी अपने आप में एक बड़ा सवाल है। जिसका जवाब आखिरकार आला अधिकारियों के पास भी नहीं है।

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