हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। किसी भी देश की तरक्की वहां के बाशिन्दों की खुशहाली पर निर्भर करती है और इस खुशहाली का पर्याय वहां के निवासियों की जीवन शैली, व्यवसाय, खान-पान, चिकित्सा-स्वास्थ्य व्यवस्था, सामाजिक सम्पन्नता, नारी सशक्तिकरण, शिक्षा, कानून तथा न्याय जैसी मूल्य परक सुविधाओं पर निर्भर करता है। समान नागरिक संहिता सम्बंधी कानून लागू करने के नियंत्रित जनसंख्या वाले देशों किसी प्रकार की कठिनाई नही होती है। लेकिन जिन देशों में जनसंख्या वृद्वि विस्फोटक स्थिति मे है वहां समान नागरिकता कानून लागू किया जाना एक जटिल प्रक्रिया है। 11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर देश की तरक्की तथा आर्थिक समृद्वि के लिए नया दृष्टिकोण, नई सोच को लेकर एक नई पहल करने करने की आवश्यकता है।
वही निरन्तर जनसंख्या वृद्वि पर रोक लगाने की दिशा मे विगत वर्षो मे किये गए प्रयासों से सीख लेकर नये संकल्प के साथ काम करने की आवश्यकता है। जनसंख्या वृद्वि सभी समस्या का मूल है। जिस प्रकार विश्व मे जनसंख्या वृद्वि का ग्राफ बढ रहा है। उसने अब तक किए जा रहे प्रयासों पर प्रश्न चिन्ह लगा दिए है। आज जहां डिजिटल युग की संकल्पना साकार करने तथा तकनीक के माध्यम से विश्व के देशों मे प्रतिस्पर्धा हो रही है, वही विकासशील देश जनसंख्या वृद्वि को रोकने के प्रयासों मे विफल सिद्व हो रहे है। जनसंख्या वृद्वि के कारण पैदावार, स्वास्थ्य सुविधाओं, व्यवसाय, उद्योग, तकनीक कितनी भी विस्तारित कर दी जाये लेकिन सभी प्रयास बौने साबित होते रहेगे। इसलिए प्रभावी एवं कारगर परिवार नियोजन योजना, लैंिगक मतभेद के प्रति जागरूकता, नागरिकों की देश के प्रति जिम्मेदारी एवं जवाबदेई सुनिश्चित करना, मानवाधिकार संरक्षण सहित दो बच्चों का कानून बनाकर कडाई से लागू करने की आवश्यकता है। अन्यथा तकनीक एवं डिजिटलाइजेशन की प्रतिस्पर्धा मे विफलता के अतिरिक्त कुछ हासिल नही होगा। जब जागों तभी सवेरा युक्ति पर विचार मंथन करते हुए जनसंख्या विस्फोट को रोकने के लिए आज ही नई शुरूआत करने की जरूरत है।





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