हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। भारतीय इतिहास वीर पराक्रमियों तथा उनकी वीरता के किस्सों से भरा पडा है। पराक्रमी शूरवीरों की गाथाएं भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। ऐसी ही वीरता की गाथा से जुडा अमर सिंह राठौर का जीवन भी उनके महान बलशाली एवं पराक्रमी होने के साथ कर्तव्यनिष्ठ होने की प्रेरणा देता है। 25 जुलाई अमर सिंह राठौर की पुण्य तिथि पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने भावांजलि अर्पित करते हुए उनकी वीरता को नमन किया। महासभा के अध्यक्ष ठाकुर यशपाल सिंह राणा के अमर सिंह राठौर की पुण्य तिथि पर नमन करते हुए कहा कि वीर पुरूष किसी धर्म, जाति अथवा समुदाय के नही होते है। उनका त्याग एवं बलिदान पूरी मानव जाति के लिए होता है। अमर सिंह राठौर के जीवन दर्शन से हमे यही शिक्षा लेनी चाहिए। उपाध्यक्ष प्रेम सिंह राणा ने उन्हे अतुल बलवान तथा पितृ भक्त के रूप में नमन किया। महासभा के महासचिव डाॅ० शिव कुमार चौहान ने उनके जीवन चरित्र से जुडी घटना पर विचार व्यक्त करते हुए कहाॅ कि अपने बल पराक्रम तथा खून से इतिहास के इन वीर पुरूषों ने इसप्रकार सींचा है कि आज भी इन महापुरूषों की वीर गाथाएं कानो मे सुनाई पडती है। शिक्षाविद्व योगेन्द्र सिंह राठौर ने उन्हे साहस एवं विपरीत स्थिति मे भी कभी न डिगने वाला वीर पुरूष बताया। सामाजिक दूरी के नियम का पालन करते हुए देश के वीर राजपूत अमर सिंह राठौर को नमन करते हुए अपनी सामूहिक रूप से अपने अपने घरों के रहकर लाॅकडाउन का पालन करते हुए अपनी भावांजलि अर्पित की। भावांजलि अर्पित करने वालों में यशपाल सिंह राणा, प्रेम सिंह राणा, योगेन्द्र पाल सिंह राठौर, डाॅ० शिवकुमार चौहान, नरेन्द्र सिंह चौहान, उपदेश चैहान, हरीशपाल सिंह पुण्डीर, मनवीर सिंह, महेन्द्र सिंह नेगी, तनुज शेखावत, डाॅ० बिजेन्द्र सिंह चौहान आदि द्वारा हदय से नमन किया गया।
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