(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। अमेरिका एवं जापान जैसे विकसित देश जहां तकनीकी, सूचना, रक्षा एवं स्वास्थ्य की बेहतर टेक्नोलाॅजी एवं संसाधन उपलब्ध है, जिसकी तुलना अन्य देशों से किया जाना संभव नही है। भारत जैसे विकासशील देश मे शायद इस स्तर की स्वास्थ्य सुविधाए भले ही उपलब्ध नही हो परन्तु मान सम्मान का भाव एवं कर्म की प्रधानता जैसे मानवीय गुण यहां सदैव प्रेरक माने जाते रहे है। गुरूकुल कांगडी विश्वविद्यालय के डाॅ0 शिव कुमार चैहान कहते है कि विश्व स्तर पर डाॅक्टर्स के कार्यो की महत्ता भले ही अलग हो लेकिन भारतीय परिवेश में डाॅक्टर्स धरती पर दूसरा परमात्मा है। समर्पण का यह भाव केवल भारतीय संस्कृति मे ही पनप सकता है। विश्व में कोरोना की महामारी ने डाॅक्टर्स की महत्ता को आज बेहतर स्थान प्रदान किया हो लेकिन भारत सदैव से ही एक चिकित्सक के प्रति समर्पण का भाव रखता आ रहा है। इसलिए शायद नेशनल डाॅक्टर्स-डे का आरम्भ भी भारत के प्रसिद्व चिकित्सक एवं भारत रत्न डाॅ0 बिधान चन्द्र राॅय को सम्मान देने के लिए उनकी जयन्ती तथा पुण्यतिथि पर 1 जुलाई को मनाया जाने लगा। यह दिन पूरे वैश्विक पटल पर मनाने के लिए ओर अधिक प्रयास करना होगा, ताकि भारतीय संस्कृति के इस भाव का विश्व पटल पर प्रचार प्रसार हो सके। चिकित्सा जैसी अनूठी सेवा को समर्पित सभी चिकित्सकों, वैद्य एवं स्वास्थ्य की पुरातन विद्या से जुडे लोगों को इस दिवस पर उनकी सेवा के प्रति सम्मान एवं आदर के साथ बधाई। नई ऊर्जा तथा जोश के साथ जन कल्याण की इस सेवा को ओर बेहतर बनाने की चुनौतियों का सामना करने को तैयार रहना जरूरी है।
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