हरिद्वार की गूंज (24*7)
(अमित रतूडी) ऋषिकेश। तीर्थनगरी और उसके समीपवर्ती इलाकों में इन दिनों खतरनाक जंगली जानवर हाथी, गुलदार की आमद बढ़ चुकी है। जिससे लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं, हालांकि वन विभाग जानवरों को पकड़ने के बाद उन्हें जंगल मे छोड़ने का प्रयास तो कर रही है। लेकिन आये दिन जानवरों की चहल कदमी ने लोगों को दहशत में डाल दिया है, ये जानवर कई मवेशियों को अपना शिकार बना चुके हैं। जबकि किसानों की फसल को भी नष्ट कर चुके हैं, गनीमत यह है कि अभी तक जानवारों ने क्षेत्र में इंसानों को कोई नुकसान नही दिया है, लेकिन हालात यही रहे तो लोग जानवरों के हमले के शिकार हो सकते हैं। ऋषिकेश और उससे लगी सीमाएं कई जनपदों और वन विभाग की रेंज में आती हैं, यंहा कभी कभार रिहायहशी इलाकों में जंगली जानवरों की चहल कदमी आम बात है। लेकिन इन दिनों ऋषिकेश में गुलदार और धरती के विशालकाय जानवर हाथी की आमद कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है, जिससे लोग दहशत में जीने को मजबूर हो गए हैं।
कहीं गुलदार की धमक तो कंही गजराज की आवाजाही से जन जीवन प्रभावित हो चुका है, हालांकि वन विभाग ने जानवरों को पकड़ने और जंगल की ओर खदेड़ने के लिए कई संसाधन लगाए हैं, आलम यह है कि कंही गुलदार पकड़ में नही आ रहे तो कंही हाथियों ने किसानों की फसल औऱ खेतों की चहारदीवारी को क्षतिग्रस्त कर दिया है। जिससे लोगों में वन विभाग के लिए गुस्सा फूट चुका है। ऋषिकेश के खांडगांव, ढालवाला, आवास विकास और आइडीपीएल में इन दिनों गुलदार और हाथी ने फसलों को रौंदने से लेकर लोगों की घरों, खेतों की दीवार को क्षतिग्रस्त कर तबाही मचा रखी है। जिससे लोगों नुकसान झेलना पड़ रहा है। जबकि विभाग समस्या के बाबत जल्द से जल्द निजात दिलाने की बात कह रहा है। जबकि स्थानीय निवासी नवीन बडोनी ने बताया कि गांव में हाथी की चहल कदमी आये दिन बनी रहती है जिसके चलते लोगो को नुकसान उठाना पड़ रहा है। बताया कि रेंजर को तत्काल इस बाबत सूचना दे दी गई है, विभाग जल्द समस्या से निजात नही दिला पता है तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।




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