हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। भारतीय संस्कृति सदैव से व्यक्ति को सम्मान एवं समर्पण के प्रति नमन का भाव बनाये रखने की प्रेरणा देती रही है। देश, काल तथा परिस्थिति के हमारे अनूकुल अथवा प्रतिकूल होने की दशा में भी हमने अपनी संस्कृति के इन मूल्यों को सदैव याद रखते हुए उनके प्रति सम्मान एवं आदर का भाव बनाये रखने मे सफलता प्राप्त की है। हरिद्वार के मनोवैज्ञानिक डाॅ० शिव कुमार कहते है कि किसी भी ऐसे व्यक्तित्व को हमने सदैव सम्मान दिया है जिन्होने देश की सामाजिक पृष्ठभूमि को आधार प्रदान करने के लिए बलिदान दिया हो। ऐसे ही भारत के एक प्रसिद्व चिकित्सक डाॅ० बिधान चन्द्र राॅय को श्रद्वांजलि और सम्मान देने के लिए उनकी जयन्ती तथा पुण्यतिथि एक साथ मनाये जाने को डाॅक्टर्स-डे के रूप में मनाया जाता है। बिहार के पटना मे सन् 1882 मे जन्मे डाॅ० बिधान चन्द्र राॅय ने कोलकाता से चिकित्सा की शिक्षा पूर्ण करने के उपरान्त लंदन से विशिष्ट उपाधियाॅ प्राप्त की और सन् 1911 में भारत मे चिकित्सकीय जीवन आरम्भ किया। कोलकाता मेडिकल काॅलेज, कैंपबैल मेडिकल काॅलेज तथा कारमिकेल मेडिकल काॅलेज मे शिक्षण कार्य करने के बाद वे राजनीति मे आ गये और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने। उन्होने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पद भी संभाला, भारत रत्न से सम्मानित डाॅ० बिधान चन्द्र राॅय का 80 वर्ष की आयु मे सन् 1962 मे जन्मदिन के दिन ही उनकी मृत्यु होने के कारण भारत मे प्रतिवर्ष 1 जुलाई डाॅक्टर्स-डे के रूप मे मनाया जाता है। इस दिन देश में सभी डाॅक्टर्स का सम्मान एवं आभार ज्ञापित किया जाता है। इस बार डाॅक्टर्स-डे इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योकि दुनिया मे कोरोना महामारी के कारण डाॅक्टर्स की जिम्मेदारी बढ गई है। सभी डाॅक्टर्स जीजान से इस वैश्विक महामारी से जंग लडते हुए लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करने मे जुटे है। इन सच्चे कोरोना वाॅरियर्स के प्रति हम सभी को कृतज्ञता का भाव रखते हुए सम्मान करना चाहिए।



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