हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में कोरोना महामारी जैसी भयंकर बीमारी के चलते हाहा कार मचा हुआ है। उसी से निजात पाने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में लॉक डाउन 22 मार्च से घोषित है। लॉक डाउन की घोषणा होते ही सभी छोटे-बड़े कार्य बंद और अधिकतर कंपनियों में ताले लग गए। जिसमें सबसे ज्यादा परेशानी मजदूर तबके के कर्मचारियों को उठानी पड़ रही है। उनके सामने रोटी का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया। और कुछ कंपनी मालिक ने तो अपनी हटधर्म और दबंगई पर उतारू होकर अपने कर्मचारियों को अप्रैल माह का वेतन देने से भी इनकार कर दिया है। एक ऐसा ही गंभीर मामला हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र आई पी 2 की एडवांस इलेक्ट्रॉनिक और गंगा मैटको कंपनियों का सामने आया है। जिनके द्वारा प्रधानमंत्री के आदेश का उल्लंघन करते हुए कर्मचारियों को अप्रैल माह की सैलरी देने से साफ इनकार कर दिया है। जिससे हिताश होकर लगभग 200 मजबूर कर्मचारियों ने कंपनी परिसर के बाहर अपनी सैलरी पाने हेतु धरना दिया गया। इतना ही नहीं कर्मचारियों की आवाज दबाने के लिए कंपनी प्रबंधक ने अपना रोब गालिब करते हुए उनको डराने धमकाने की कोशिश भी की, जो मीडिया ने अपने कैमरे में मौकेेेे पर पहुंचकर कैद किया है। वही पुलिस प्रशासन भी मौके पर पहुंचा और कर्मचारियों को लॉक डाउन का हवाला देते हुए धरना समाप्त करनेे को कहां गया। जिसका फायदा उठाते कर कंपनी प्रबंधक ने कर्मचारियों को वहां से चलता बनाया दिया। 
    देखें वीडियो: लेवर इंस्पेक्टर सुरेश चंद आर्य
लेकिन लॉक डाउन की मार झेल रहे कर्मचारियों को कंपनी प्रबंधकों द्वारा किसी भी तरह का ठोस आश्वासन नहीं दिया गया। और अपनी कंपनी एसोसिएशन एकता का हवाला देते कर्मचारियों पर रोब गालिब करते रहे। इस स्थिति में कर्मचारियों द्वारा किए गए आक्रामक धरने को लॉक डाउन का उल्लंघन माने या गरीब मजबूर कर्मचारियों का उत्पीड़न। जब कंपनी प्रबंधन से बात की गई तो उन्होंने कर्मचारियों को सैलरी देने से साफ इनकार कर दिया। वही कर्मचारियों की समस्या को प्रशासनिक अधिकारी असिस्टेंट लेबर कमिश्नर सुरेश चंद आर्य को अवगत कराया गया, तो उन्होंने फैक्ट्री प्रबंधन को कर्मचारियों की सैलरी देने के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहां कि यदि कोई भी कंपनी कर्मचारियों को सैलरी दिए जाने के संबंध में सरकार के आदेश का उल्लंघन करती है, तो उस कंपनी के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। 
             देखें वीडियो: कंपनी कर्मचारी
हालांकि इस आश्वासन के साथ सभी कंपनी वर्कर्स मजदूरों ने धरना स्थगित कर दिया। लेकिन कंपनी कर्मचारियों का कहना है यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं होता, तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन अनशन के लिए बाध्य होंगे। जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की होगी। आपको बता दे कि यह पहला मामला नहीं है। लॉक डाउन में कंपनी प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों को सैलरी ना देने के कई मामले सामने आ चुके हैं। कंपनी प्रबंधन अपनी हटधर्म के चलते कानून की धज्जियां उड़ाते भी देखे गए हैं। जिसके चलते अपनी मांगों को लेकर कर्मचारियों के धरने प्रदर्शन आम बात हैं। और लॉक डाउन के समय में उद्योग की रीढ़ कहां जाने वाला कर्मचारी खून के आंसू रोने को मजबूर है। उनके सामने रोटी कपड़ा संकट है अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए उनको कई घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। अब देखना होगा की क्या पीड़ित कर्मचारियों को उनकी सैलरी मिलती है या नहीं, यह कंपनी प्रबंधन द्वारा मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। यह तो आने वाला समय ही बताएगा की प्रशासन मजबूर कर्मचारियों के प्रति कितना संवेदनशील है यह भी अपने आप में एक बड़ा सवाल है।
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