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गुरूकुल कांगडी विश्वविद्यालय ने बलबीर सिंह को दी भावभीनी श्रद्वाजंलि 

(रजत चौहान) हरिद्वार। गोल्डन मैन के नाम से मशहूर भारतीय हाॅकी को ओलम्पिक मे तीन बार जीत दिलाने के साथ सबसे ज्यादा गोल करने वाले बलबीर सिंह सीनियर आज हमारे मध्य नही रहे। हाॅकी टीम का सन् 1948 में लंदन ओलम्पिक, सन् 1952 मे हेल्सिंग ओलम्पिक तथा सन् 1956 मेलबर्न ओलम्पिक मे स्वर्ण जीतने वाली टीम के सदस्य रहे बलबीर सिंह को श्रद्वांजलि अर्पित की। गुरूकुल कांगडी विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग की ओर से हाॅकी के इस सच्चे सिपाही को मौन स्मरण करते हुए श्रद्वाजंलि अर्पित की, अपने श्रद्वाभाव व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० रूप किशोर शास्त्री ने कहा कि बलबीर सिंह सीनियर के दिल और दिमाग मे केवल हाॅकी बसती थी। वह जब तक रहे देश की हाॅकी के विकास को समर्पित रहे। उनका ऐसे समय मे जाना हाॅकी तथा खिलाडियों के लिए अपूरणीय क्षति है। शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग तथा ऑल इण्डिया स्वामी श्रद्वानंद हाॅकी टूर्नामेंट के अध्यक्ष प्रो० आर०के०एस डागर ने अपने श्रद्वांजलि संदेश में बलबीर सिंह को याद करते हुए कहा कि बलबीर सिंह ओलम्पिक खेलने से पहले हाॅकी के तीन बार नेशनल खेले और तीनो बार अलग फोरमेंट मे खेले। पहली बार पंजाब यूनिवर्सिटी की टीम मे, दूसरी बार पंजाब पुलिस की टीम मेे और तीसरी बार पंजाब स्टेट की हाॅकी टीम मे खेलते हुए हाॅकी की नेशनल चैम्पियनशिप में विजेता बन कर उभरे। हाॅकी टूर्नामेंट के सचिव डाॅ० अजय मलिक ने अपने श्रद्वा सुमन अर्पित करते हुए बलबीर सिंह सीनियर के 1958 टोक्यिों एशियन हाॅकी गेम्स की सिल्वर मेडलिस्ट टीम बनने की स्मृतियों को साझा किया। वर्ष 2008 में विश्वविद्यालय चैम्पियन बनी हाॅकी के कैप्टन दुष्यंत राणा ने उन्हे नेशनल हीरो के रूप में श्रद्वा सुमन अर्पित किए। श्रद्वांजलि अर्पित करने वालों मे कुलसचिव प्रो० दिनेश चन्द्र भटट, परीक्षा नियंत्रक प्रो० एमआर वर्मा, संकाय के डीन प्रो० ईश्वर भारद्वाज, डाॅ० शिव कुमार चैहान, वीरेन्द्र पटवाल, धर्मेन्द्र विष्ट, अश्वनी कुमार, हेमन्त नेगी सहित हाॅकी के पूर्व खिलाडी उपस्थित रहे, सभी ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए श्रद्वांजलि अर्पित की।
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