हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। जनता में जानकारी का अभाव या लोगो की कही सुनाई बातो में आकर स्वयं को प्रताड़ित करना। कुछ ऐसा ही प्रतीत हो रहा है, जब आजकल डाकखानों के बाहर सोशल डिस्टेन्स की धज्जियां उड़ाती हुई लगी हुई लम्बी लम्बी लाइन देखी जा रही हैं। ज्वालापुर का मुख्य डाकखाने के बाहर 2 दिन की छुट्टी के बाद भीड़ जुट गई। इसके बारे में जब वहां महिलाओं से पूछा तो उन्होंने बताया कि जिनके डाकखाने में खाते खुले हुवे है उनके खातों में पैसे डालेंगे। जिसके लिये हम भी खाता खुलवाने आये हैं। इस विषय मे जब डाकखाने के पोस्टमास्टर साहब वेनेजुएला से पूछा तो उन्होंने बताया कि जनता ने कही से सुन लिया होगा जिसके लिये ये अकाउंट खुलवाने को एकत्र हो गए हैं। जबकि ऐसा कोई सरकारी आदेश विभाग द्वारा नही मिला है। लेकिन हम किसी को डाकखाने में खाता खुलवाने को मना भी नही कर सकते हैं। ज्वालापुर चूंकि कोरोना को लेकर सुर्खियों में आया था उसको देखते हुवे यहाँ ऐसे सोशल डिस्टेन्स की धज्जियां उड़ना खतरनाक सिद्ध हो सकता है। अपनी क्षमता के अनुसार एक मात्र महिला होमगार्ड मोहनी भीड़ को सुव्यवस्थित करने में संघर्ष करती दिखाई दे रही थी जिसकी बात वहां भीड़ वाले अनसुनी कर रहे थे। इसकी सूचना निकट रेलवे पुलिस चौकी में देने का प्रयास किया तो वहां उपस्थित कॉन्स्टेबल ने चेतक को सूचित करने को कहा गया। बहुत बड़ी विडम्बना ये भी है कि समय की जरूरत को ध्यान में रखते हुवे जनपद स्तर पर डाक विभाग द्वारा कोई टोल फ्री या अन्य नम्बर नहीं है जिससे जनता मोबाइल द्वारा घर बैठे आवश्यक जानकारी ले सके। कोरोना से जनता को बचाने के लिये हरिद्वार पुलिस को चाहिए कि वो इस तरह की भीड़ में सामाजिक दूरी बनाये रखने के लिये आवश्यक ठोस कदम उठाये।
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