हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। कोरोना वायरस के कारण लॉक डाउन में जिन लोगो को विवशता में देहरादून जनपद के जोली ग्रांट या एम्स हॉस्पिटल जाना पड़े तो उनके मन मे बहुत सी दुविधा होती हैं कि उन्हें हरिद्वार जनपद से देहरादून जनपद में प्रवेश करने पर किन किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उसी को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार कोतवाली अंतर्गत सप्तऋषि चौकी प्रभारी एल०एस बुटोला से मुलाकात की। तो उन्होंने बताया कि जो राहगीर चिकित्सा सम्बंधित कार्यो हेतु जौली ग्रांट, एम्स या अन्ये किसी अस्पताल हेतु हरिद्वार आ रहे है उनके अस्पताल के पेपर को देखकर जनपद में प्रवेश दे दिया जाता है। इसी बात को दोहराते हुए देहरादून जनपद अंतर्गत रायवाला थाने से हरिद्वार बॉर्डर पर ड्यूटी दे रही महिला उपनिरक्षक गीता चौधरी ने बताया कि देहरादून जनपद में चिकित्सा हेतु जाने वालों को उनके डॉक्टर द्वारा दिया पर्चा के आधार पर अनुमति दे दी जाती है। लेकिन जो लोग चिकित्सा का बहाने से अनावश्यक रूप से सड़कों पर टहलने के उद्देश्य से देहरादून जनपद में जाने का प्रयास करते हैं उनके लिये बॉर्डर पर ही डॉक्टर की टीम तैनात है।
ताकि लॉक डाउन का उलंघन करके सड़को पर घूमने के बहाने ढूढने वालो पर आवश्यक कार्यवाही कर सके। इसके अलावा चौकी प्रभारी एल०एस बुटोला ने बताया कि वो जनपद के बॉर्डर पर होने के कारण ड्यूटी में किसी भी तरह की कोताही बरतने के मूड में नही है। इसी कारण वो पिछले 3 महीने से अपने परिवार से भी नही मिले हैं। जनता से अपील करते हुवे कहा कि यदि कोरोना योद्धाओ (चिकित्सक पुलिस) को जनता लॉक डाउन का गम्भीरता से पालन करने में सहायक बने तो कोरोना से देश की जनता को बचाने में अच्छी सफलता पाई जा सकती है। वही रायवाला थाने से कॉन्स्टेबल पंकज का कहना था कि राहगीरों ने विभिन्न कारणों से इतने वाहन पास बनवा लिए है कि कभी कभी तो लॉक डाउन जैसी हाई वे पर खामोशी दिखाई ही नही देती हैं। सप्त ऋषि चौकी इंचार्च एल०एस बुटोला ने बताया कि सप्त ऋषि पुलिस द्वारा स्थानीय समाजसेवीयो के माध्यम से भोजन के पैकेट की व्यवस्था की गई है। जिससे कि यदि कोई राहगीर भूखा हो तो उसकी मानवता के आधार पर मदद की जा सके। इस बॉर्डर की सराहनीय बात ये भी देखी गयी कि पुलिस के जवानों की तत्तप्रता के चलते यदि कोई पैदल बॉर्डर पार करके जाने का प्रयास करता है तो उसे आगे बढ़ने से रोक लिया जाता है। फिर उनके नाम पता लिखकर प्रशासन को दे दिये जाते हैं। ताकि प्रशासन स्तर पर उनकी मदद की जा सके।




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