हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। दिन प्रतिदिन कोरोना के केस बढ़ने पर है फिर चाहे मामला उत्तराखंड का हो या पूरे देश का। ऐसे में प्रत्येक जनपद के जिलाधिकारी की प्लानिंग और उसके जिम्मेदार अधिकारियों के सूझबूझ की परीक्षा पर निर्भर करेगा कि वो कोरोना से कैसे विजय पायेगा। इस मामले में जिलाधिकारी को चाहिए कि वो यदि अत्यधिक व्यस्त हैं तो अपना  सहायक रखे मगर जिलाधिकारी का नम्बर यदि ढूढने से भी नही मिल रहा तो इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि वो स्वयं को मीडिया या जनता दूर रखने में हितकारी समझ रहे हो। ताजा मामला हरिद्वार का है जहां सीतापुर में गणेश विहार के किराये पर रहने वाले अजब सिंह चौहान को पंजाब से आने के बाद 16 मई को सरकारी अस्पताल के बाद होटल जाह्नवी डेल मे कोरंटिन कर दिया गया था। उसके सैम्पल लेने के बाद 7 दिन बाद भी जब उसके परिजनों को किसी मेडिकल स्टाफ ने कोई संतोषजनक सांत्वना नही दी कि रोगी अजब सिंह चौहान की रिपोर्ट कब तक आयेगी? तो उनके पड़ोसी ने सोशल मीडिया के माध्यम से वाट्सअप के एक ग्रुप 'फ्रेंड्स एवर' में पीड़ित की पीड़ा व्यक्त की। उस पर उनकी आवश्यक सहायता करते हुवे पत्रकार गगन शर्मा ने सीएमओ हरिद्वार से बात की लेकिन वो कोई ठोस उत्तर नही दे पाई। उसके बाद टोल फ्री नम्बर 104 पर दो बार कॉल करने पर भी सही जानकारी नही मिली।  
उत्तराखंड का अन्य नम्बर 01352722100 तो लगा ही नही। उसके अलावा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के नम्बर डायल किये तो मगर सिर्फ सहायक मेला अधिकारी हरबीर सिंह ने तो कॉल बैक की उसके अलावा किसी अधिकारी का नम्बर नही लगा। अफसोस शाम तक ऐसा कही से भी संतोषजनक उत्तर नही मिला ताकि उस रोगी के परिजनो को कुछ राहत दे पाये। डॉक्टर राजेश गुप्ता द्वारा बाद में ये स्वीकार कर लिया गया कि सैम्पल उन्ही के द्वारा लिया गया था साथ ही बताया कि उसकी रिपोर्ट दून मेडिकल कॉलेज गयी हुई है कब तक आयेगी कुछ नही कहा जा सकता। उसके बाद रोगी का कहना है कि निसंदेह होटल में कोई असुविधा नही हो रही है मगर बुखार उतर जाता है चढ़ जाता है जिनकी ड्यूटी लगाई हुई है वो पैरासिटामोल दे देते हैं। मगर उसके अलावा तबियत ज्यादा खराब होने या अन्य स्वास्थ्य समस्या हेतु कोई सुनवाई नही है। प्रश्न ये भी है कि जो सरकारी नम्बर सरकार जारी करती है वो व्यस्त रहने के नाम पर जनता का शोषण क्यो करते हैं, अभी तो हरिद्वार मे माँ गंगा की कृपया से केस न के बराबर है सोचो हरिद्वार जिला प्रशासन के योग्य जिम्मेदार अधिकारियों की ड्यूटी महाराष्ट्र, दिल्ली मे लग जाये तो वहां ऐसे प्रशासनिक अधिकारी कोरोना में क्या सेवा दे पायेंगे, य अपने आप मे बड़ा सवाल है, जिन्हें ये जानकारी देने में पल्ला झाड़ देते हैं कि रिपोर्ट कब आयेगी और पीड़ित का कैसे ख्याल रखे, इसी अजब सिंह चौहान के परिजनों की दयनीय हालत को देखकर पीड़ित परिवार की मदद करने वाली समाज सेविका प्रगति बाल विकास विभाग में कार्यरत हैं। हरिद्वार प्रशासन द्वारा किसी की कोई जिम्मेदारी तय न होने पर बेहद आक्रोशित है। उनका कहना है कि यह केस उदाहरण है कि राज्य सरकार और हरिद्वार प्रशासन कोरोना को लेकर कितना गम्भीर है, कही धूप में बाहर से आये यात्रियों को भोजन जानकारी नही तो कही स्वयंवर पैलेस में ठहरे लोगो की भूख की जानकारी जब कांग्रेस के नितिन तेश्वर को हुई तो वो फल लेकर वहां उनकी मदद को गए। मगर सरकारी अधिकारी नदारद है उनके फोन लगना कौन बनेगा करोड़पति में अमिताभ बच्चन से बात करने जैसा दुर्लभ है। पीड़ित परिजनों और आक्रोशित समाजसेवियों का कहना है कि वो इस घटना का अनुभव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की ऐप पर शेयर करेगे।
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