हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। रामायण में लंका जाने के लिए राम हेतु निर्माण के दौरान एक छोटी सी गिलहरी ने भी इस कारण से वानरों की मदद करनी चाही ताकि भविष्य में उसकी भूमिका सकारात्मक परिणाम पाने वालों में हो न कि नकारात्मक परिणम पाने वालों में। जी हाँ समाज को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाने में पुलिस, डॉक्टर, समाजसेवी और दानवीर अपना अपना योगदान करके स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। तो दूसरी और हमारे ही समाज का वो युवा वर्ग है जो इस लॉक डाउन के दौरान खुद को घर मे घुटन महसूस कर रहा है। ऐसे युवक चाहे तो आपदा की इस घड़ी में समाज के बहुत ही उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। शहर हो या गांव उसमे ऐसे परिवार भी मिल जाते हैं, सामान्य दिनों में जिनकी आय का कोई निश्चित साधन नही होता। ऐसे लोग दिहाड़ी मजदूर या छोटे व्यापारी भी हो सकते हैं। पिछले 11 दिन से ज्यादा समय बीतने पर अब ऐसे परिवार और उनके बच्चे अंदर से टूटने लगे हैं। उन्हें कल की चिंता के अलावा वर्तमान में भूख की चिंता सताने लगी हैं। माना कि हमारे समाज मे विशेष कर हरिद्वार में समाजसेवी ओर शासन, प्रशासन, राज्य औऱ केंद्र सरकार के प्रयासों से पहले ही स्वयं के खर्चे पर पीड़ितों की सेवा में लगे हुवे है। घर मे घुटन महसूस करने वाला युवा चाहे तो 7 से 1 बजे के बीच ऐसे पीड़ित परिवार जिनके घर अब खाने को राशन नही है, या राशन कार्ड भी नही है, को खोज कर उनकी सूची बना सकते हैं। सूची बनाने के बाद उस सूची को ग्राम प्रधान, पार्षदों या उन विशाल गर्ग और यू सी जैन जैसे अन्न बांटने वालो को दे सकते है। अन्न का दुरुपयोग रोकने हेतु आधार कार्ड की मदद ली जा सकती है। आपदा के समय देश या समाज की सेवा करने का अवसर हर किसी को नही मिलता। समाज मे कुछ ऐसे लोग मिलेंगे जिनके पास धन है लेकिन समय नही, कुछ ऐसे हैं जिनके पास समय है धन नही तो दोनों ही  आपस मे तालमेल करके विपदा की घड़ी में पीड़ितों के काम आ सकते हैं।
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