हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। महापुरूषों ने सदैव समाज को नई दिशा प्रदान की है। देश की एकता अखण्डता बनाए रखने में संत महापुरूषों व ब्राह्मणों का विशेष योगदान रहा है। उक्त विचार बाबा बलराम दास हठयोगी महाराज ने भारतमाता पुरम स्थित एकादश रूद्र पीठ में आयोजित ब्राह्मण धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति व सनातन धर्म की धुरी ब्राह्मण समाज ने हमेशा समाज का मार्गदर्शन किया है। देश की एकता अखण्डता बनाए रखने के लिए त्याग और बलिदान देने में भी ब्राह्मण समाज सदैव अग्रणी रहा। उन्होंने समाज से एकता का आह्वान करते हुए कहा कि एकजुट होकर की लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। समाज के सभी वर्गो को एकजुट कर देश मजबूती प्रदान करने में योगदान करें। महामण्डलेश्वर राजगुरू स्वामी संतोषानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि ब्राह्मण धर्म सभा के पदाधिकारी पूरे राज्य में जाति परंपरा को समाप्त करने में अपना योगदान देंगे। राष्ट्र की उन्नति एकता व अखण्डता को लेकर देश भर में जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। समाज में कई तरह की भ्रांतियां उत्पन्न हो रही हैं। जिन कारणों से समाज विघटन की और बढ़ रहा है। ऐसे में मिलजुल कर ही समाज में जनचेतना उत्पन्न करनी होगी। जाति के भेदभाव को समाप्त करने के लिए वृहद स्तर से अभियान चलाए जाएंगे। सनातन धर्म परंपराओं का निष्ठा पूर्वक निर्वहन किया जाना चाहिए। धर्मनगरी से ब्राह्मण धर्म सभा की कार्य योजनाएं प्रारम्भ हो चुकी हैं। आपसी समन्वय एकता व अखण्डता से ही राष्ट्र प्रगति की और अग्रसर होगा। संत समाज गौ संरक्षण, गंगा स्वच्छता आदि को लेकर भी आम जनमानस को जागरूक करने का काम कर रहा है। सच्ची निष्ठा के साथ धार्मिक क्रियाकलाप संपन्न होंगे तो समरसता को वातावरण समाज में बनेगा। स्वामी ऋषिश्वरानंद महाराज ने कहा कि म.म.स्वामी संतोषानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य में ब्राह्मण धर्म सभा सामाजिक एकजुटता के लिए सकारात्मक प्रयास कर रही है। संत समाज इसमें पूरा सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि समाज का मार्गदर्शन वाले संत समाज को भी एकजुट होना होगा। जगतगुरु आनन्देश्वर महाराज ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में संतों ने हमेशा अग्रणी भूमिका निभायी है। आगे भी संत सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए अपने जीवन को समर्पित करते रहेंगे। इस अवसर पर महंत दुर्गादास, महंत देवेंद्र महाराज, म.म.राजेश्वरानन्द, महंत रविन्द्रानन्द, महंत ऋषिनन्द, आचार्य संतराम, अनुराग मुद्गल, विनोद शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, शीतल अवस्थी, देवेंद्र शर्मा, विद्यानन्द महाराज, पंडित कैलाश कृष्ण, धर्मेन्द्र शर्मा, संतराम भट्ट, योगेंद्र पाठक आदि सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।



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