हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज इन दिनों नशा भारत छोड़ों व व्यसन मुक्ति पर एक विशेष अभियान को गति देने में जुटा है। इस निमित्त तीन दिवसीय व्यसन मुक्ति राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें उत्तराखण्ड, उप्र, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मप्र, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियणा व चण्डीगढ़  राज्यों के चयनित प्रतिनिधि शामिल रहे, अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या व श्रद्धेया शैलदीदी से प्रतिनिधियों ने भेंटकर वर्तमान समय की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बढ़ते नशा व दुर्व्यसनों का प्रयोग पर अंकुश लगाने हेतु मार्गदर्शन लिया। इस अवसर पर युवा चेतना के उद्घोषक डॉ. पण्ड्या ने कहा कि यदि भारत को विकसित, सभ्य व सुसंस्कृत राष्ट्र की श्रेणी में लाना है, तो नशा व नशीले पदार्थों पर अंकुश लगाना आवश्यक है। युवाओं सहित समाज के प्रत्येक वर्ग को इस दिशा में सार्थक पहल करने के लिए व्यसन मुक्ति आन्दोलन से जुड़कर स्वयं को नशा व दुर्व्यसन से दूर रखना होगा। नशा जितना पीने वाले का नुकसान करता है, उससे ज्यादा परिवार व समाज का। उन्होंने कहा कि बैनर्स, लघुनाटिका, नुक्कड़ नाटक आदि के माध्यम से जन जागरण अभियान को गति दिया जा सकता है। श्रद्धेया शैलदीदी ने युवावर्ग को नशा से मुक्त करने पर बल देते विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से दुर्व्यसनों से होने वाली हानियों पर प्रकाश डाला। समापन सत्र को संबोधित करते हुए शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्ता श्री वीरेश्वर उपाध्याय ने कहा कि भारत से नशा व दुर्व्यसनों को जड़ से उखाड़ फेंकने का समय आ गया है। इन दिनों तमाम तरह की बुराइयाँ अपनी जड़े जमा रखी हैं, व्यसन मुक्ति अभियान के अंतर्गत चलाये जा रहे रचनात्मक कार्यों को स्कूलों, महाविद्यालयों से लेकर जन-जन को नशा से होने नुकसानों के प्रति सचेत करें। शिविर समन्वयक ने बताया कि तीन दिन चले इस कार्यशाला में सैद्धांतिक व व्यावहारिक के कुल पन्द्रह सत्र हुए, जिसे डॉ. ओपी शर्मा, डॉ. बृजमोहन गौड़, डॉ. शिवानन्द साहू, श्री चक्रधर थपलियाल, श्री सदांनद अंबेकर आदि ने संबोधित किया। शिविर के समापन सत्र से पूर्व व्यसन मुक्ति अभियान की कार्य योजना पर विस्तृत चर्चा करते हुए प्रतिभागियों ने अपने-अपने निकटवर्ती क्षेत्रों के शैक्षणिक संस्थानों में प्रमुखता के साथ कार्य करने पर बल दिया।
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