हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौहम्मद आरिफ) हरिद्वार। बहादराबाद ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत जसवावाला गांव में चकबंदी विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों द्वारा दलालों के साथ सांठ गांठ कर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचारी का खेल खेला जा रहा है। छोटे किसानों की कीमती जमीनों को खुर्द बुर्द कर आपने चहतो को फायदा पहुंचाया गया है पूर्व में भी ग्राम प्रधान सहित ग्रामीणों ने चकबंदी विभाग पर गंभीर आरोप लगाऐ थे और ग्राम वासियों कहना है कि 1962 की चकबंदी के दौरान गांव के निकट लगभग 60 बीघहा जमीन दी गई थी। 60 बीघहा ग्राम समाज की जमीन में पानी की टंकी स्कूल आदि बनाये गए हैं। बाकी बची जमीन को चकबंदी पटवारी द्वारा अपने चहते को पट्टे आवंटित कर दिऐ हैं।
ग्राम प्रधान श्रीमती मनीता सैनी ने चकबंदी पटवारी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि नपती के समय हम लोगों को सूचना नहीं दी गई और अपनी मनमानी कर कुछ अपने चहते लोगों को साथ लगाकर उनके इशारे पर कार्य किया जा रहा है। तथा ग्राम पंचायत जमीन गांव से लगभग 2 किलोमीटर दुर नदी में दर्शाई जा रही है। जिससे ग्राम वासियों में रोष के साथ साथ विरोध भी जताया जा रहा है। वहीं ग्रामीणों ने पटवारी सुबोध सैनी पर आरोप लगाया था कि लगभग 12 बीघहा जमीन जो चकबंदी में छोड़ी गई थी। पूर्व प्रधान प्यारेलाल को हवाई चक लगाकर दे दी गई है जो कि गरीब व्यक्तियों को आवंटित की जानी थी। जिसमें गरीब अपना कूड़ा कचरा उपले पाथने का कार्य कर सके। लेकिन पटवारी सुबोध सैनी के साथ मिलीभगत और लेन-देन से यह जमीन पूर्व प्रधान प्यारेलाल के नाम कर दी गई है। मामला यही नही रुका ग्राम प्रधान श्रीमती मनीता सैनी ने दलालो द्वारा धोकाधड़ी, जालसाजी कर गरीब किसानो से पैसे लेने के गंभीर आरोप भी चकबंदी विभाग पर लगाये थे। जब मीडिया ने चकबंदी सी०ओ० से इस संबंध में उनकी बाइट लेनी चाही थी तो चकबंदी सी०ओ० दीवान सिंह नेगी ने अपना पल्ला झाड़ते हुए बाइट देने से साफ मना कर था। और कहा था कि जमीन को लेकर गांव जसवावाला में इस तरह का कोई भी मामला नहीं है और मैं चुनाव में व्यस्त हूं अब देखने वाली बात यह है कि सी०ओ० चकबंदी दीवान सिंह नेगी ने बिना जांच के ही पुष्टि कर दी थी कि जसवावाला गांव में हो रही चकबंदी का कार्य विभागीय कर्मचारी सही तरीके से निभा रहे हैं मामला यह दर्शा रहा था कि कहीं ना कहीं चकबंदी विभाग भ्रष्टाचारी में लिप्त है। और मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। और ऐसा ही हुआ जब चकबंदी विभाग के आलाधिकारी ने न्यूज़ पेपर, सोशल और चैनलो पर ग्रामीणों द्वारा दी गई भ्रष्टाचारी की जानकारी की पोल प्रकाशित की, तो आनन-फानन में चकबंदी विभाग के आलाधिकारी ने पटवारी सुबोध सैनी का तत्काल ट्रांसफर कर दिया। जिससे जसवावाला गांव की चकबंदी में भ्रष्टाचार, जालसाजी के मामले को दबाया जा सके। और पटवारी चमन लाल को जसवावाला गांव की चकबंदी का कार्यभार सौंपा गया। लेकिन पटवारी चमन लाल ने भी पटवारी सुबोध सैनी की राह पर चलकर भ्रष्टाचारी को ओर पंख लगा दिये, और विभागीय अधिकारी व दलालों के साथ मिलीभगत कर षड्यंत्र रचा और गांव के गरीब किसान की आवाज उठाने वाली ग्राम प्रधान श्रीमती मनीता सैनी व उनके पति राकेश सैनी को दबाने की कोशिश की गई। जोकि वो लोग इस षड्यंत्र में कामयाब भी रहें, परिणाम सर्वरुप पुर्व प्रधान प्यारे लाल की भाती मैन रोड पर ग्राम प्रधान श्रीमती मनीता सैनी का भी हवाई चक लगा दिया गया। जिससे गरीब किसानो की उठती हुई आवाज भ्रष्टाचारी में दबा दी गई। और अब जसवावाला की चकबंदी संपन्न करने में दलाल, भ्रष्ट अधिकारी, कर्मचारी फाइनल प्रक्रिया में लगे हुए हैं जिससे बड़े पैमाने पर की गई चकबंदी प्रक्रिया में भ्रष्टाचारी,जालसाजी का खेल दब सके। नाम ना छापने की शर्त पर ग्रामीणों का कहना है कि शासन प्रशासन को जसवावाला की चकबंदी की गहनता से जांच करनी चाहिए, जिससे भ्रष्टाचारी में लिफ्ट अधिकारी कर्मचारी व दलालों पर सख्त कार्रवाई हो सके और गरीब किसानों को इंसान मिल सके, जिससे शासन प्रशासन पर जनता का पूर्ण रूप से विशवास बना रहे। हालांकि चकबंदी विभाग भ्रष्टाचारी, जालसाजी करने में पिछे नहीं है आए दिन भ्रष्टाचारी, जालसाजी के कारण किसान चकबंदी विभाग दफ्तर पर धरना प्रदर्शन करते हुए देखे जा सकते हैं आज देश का अन्नदाता भ्रष्ट अधिकारी, कर्मचारी, भू माफियाओं तथा दलालों की जालसाजी का शिकार होकर खून के आंसू रो रहा है लेकिन देश की सरकार चकबंदी विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करने में पूर्ण रूप से विफल साबित हो रही है जिसका खामियाजा इंसाफ के लिए भटकते किसान अपने प्राणो को गवा कर चुका रहे है। हाल ही में चकबंदी विभाग अधिकारी और भूमाफिया का भ्रष्टाचारी, जालसाजी का मामला भी सामने आ चुका है बड़े पैमाने पर फिरोजपुर बेलडा गांव की जमीन को चकबंदी अधिकारियों द्वारा खुर्द बुर्द किया गया था जमीन की जांच को लेकर हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया, जिसने लंबी जांच के बाद पाया कि फिरोजपुर बेलडा गांव के किसानों की जमीन पर बड़े पैमाने में गड़बड़ी हुई है जिसके बाद एसपी सिटी हरिद्वार के आदेश पर 22 लोगों के विरुद्ध बहादराबाद थाने में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। अब देखना होगा कि अन्नदाता कहे जाने वाले किसानो को इंसान मिलता है या नहीं, या भ्रष्ट अधिकारी, कर्मचारी व दलालो की जालसाझी की भेट चड़कर किसान आत्महत्या करने को मजबूर होता रहेगा, या फिर जसवावाला गांव की चकबंदी में माननीय न्यायालय हाई कोट का दरवाजा खटखटाना पढेगा, जिससे किसानों को इंसाफ और दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो सके, यह भी अपने आप में एक बड़ा सवाल है।




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