(गगन शर्मा) हरिद्वार। यातायात के नियमो का उलंघन करने वालो पर अब जुर्माना बढ़कर लगाने का उत्तराखंड में पहला दिन था। मगर पुलिस विभाग के एक अधिकारी के अनुसार चुकी अभी उत्तराखंड में गवर्नर द्वारा सरकारी आदेश न आने के कारण जो चालान काटे गए हैं उन्हें नगद न काटकर कोर्ट के नाम चालान काटना ज्यादा उचित समझा। आज दिन भर जो कैमरे में कैद हुवा उसके अनुसार कुछ प्रश्न उठते हैं, कि यदि वाहन चालक पुलिस वाला हो, तो क्या उसकी पिछली सवारी को डबल हेलमेट की जरूरत नही पड़ेगी क्या?
अक्सर आरोपी को दो पहिये वाहन पर ले जाते हुवे पुलिसकर्मी डबल हेलमेट या ट्रिपल सवारी से यातायात के नियमो का उलंघन करते हैं जो कि पुलिस विभाग द्वारा नजर अंदाज ही किया जाता है। पत्रकार ज्यादा यातायात के नियमो का उलंघन करते हैं या पुलिस इस बहस में पड़ने के बजाय किरण बेदी जी की तरह अपने फर्ज को अंजाम दिया जाय तो ज्यादा बेहतर होगा। जहां देश के काफी राज्यो में ट्रैफिक रूल उलंघन करने वालो पर नए जुर्माना लगाया गया।
तो वही हरिद्वार में इसका कोई असर देखने को नही मिला। किसी बाइक पर 3 सवारी, किसी पर चार सवारी तो किसी पर पांच सवारी भी देखने को आज मिली। समान्यतः की तरह बाइक और कारो में मोबाइल पर बतियाते हुवे गाड़ी चलाते देखा गया। आम जनता की तरह जिन पुलिस वालो को हेलमेट पहनने की आदत नही वो अन्ये दिनों की तरह बिना हेलमेट या बाइक पर हेलमेट टांग कर बाइक चलाते देखे गए। स्टाफ होने के कारण उन्हें एक हजार का चालान कटने का कोई ख़ौफ़ नही था। ऐसे पुलिसकर्मियों को पूर्ण विश्वास होता है कि स्टाफ होने के कारण इनका चालान सी पी यू नही काटेगी,
अन्य पुलिस वालों की तो बात छोड़ दो। समाज मे जैसे हर तरह के लोग होते हैं ऐसे ही पुलिस विभाग में भी हर तरह के लोग जहाँ सीपीयू कर्मियों को हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट पहनना, पहनना उनकी आदत में होता हैं। जैसे कि एक होमगार्ड का जवान हेलमेट पहनकर ड्यूटी जाते देखा गया। हरिद्वार में पिछले कई वर्षों से तैनात एक 55 वर्षीय दरोगा को कभी हेलमेट पहनकर बाइक चलाते नही देखा गया। इसके अलावा वो दरोगा सार्वजनिक स्थलों पर दिनभर में 15 से 20 सिगरेट धूम्रपान करते अवश्य दिखाई देता हैं। ऐसे पुलिसकर्मी विभाग की छवि को गन्दा करते हैं। बाइक ही नही अपितु कार चालको को वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना 40 से 60% आम बात है। आम जनता की सीपीयू से अपेक्षा रहती है कि वो जनता के बीच अच्छा सन्देश देने हेतु अपने स्टाफ पुलिसकर्मियों, पत्रकार, नेताओ के चालान काटकर मीडिया से शेयर करे। ताकि आम जनता द्वारा उनके ऊपर पक्षपात का आरोप न लगे। आम जनता का पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि 50 % से ज्यादा उनके स्टाफ वाले बिना लाइसेंस, इंश्योरेंस, गाड़ी के पेपर बिना ही अपना वाहन चलाते हैं। इसकी जांच भी महामहिम राज्यपाल को समय समय पर करानी जरूरी है। अधिकांश पुलिस अधिकारी की दुविधा होती है कि हमे भी समाज मे रहकर अपने फर्ज को अंजाम देना होता है इसलिए चालान काटते समय हर पहलू पर ध्यान देना पड़ता हैं।
अक्सर आरोपी को दो पहिये वाहन पर ले जाते हुवे पुलिसकर्मी डबल हेलमेट या ट्रिपल सवारी से यातायात के नियमो का उलंघन करते हैं जो कि पुलिस विभाग द्वारा नजर अंदाज ही किया जाता है। पत्रकार ज्यादा यातायात के नियमो का उलंघन करते हैं या पुलिस इस बहस में पड़ने के बजाय किरण बेदी जी की तरह अपने फर्ज को अंजाम दिया जाय तो ज्यादा बेहतर होगा। जहां देश के काफी राज्यो में ट्रैफिक रूल उलंघन करने वालो पर नए जुर्माना लगाया गया।
तो वही हरिद्वार में इसका कोई असर देखने को नही मिला। किसी बाइक पर 3 सवारी, किसी पर चार सवारी तो किसी पर पांच सवारी भी देखने को आज मिली। समान्यतः की तरह बाइक और कारो में मोबाइल पर बतियाते हुवे गाड़ी चलाते देखा गया। आम जनता की तरह जिन पुलिस वालो को हेलमेट पहनने की आदत नही वो अन्ये दिनों की तरह बिना हेलमेट या बाइक पर हेलमेट टांग कर बाइक चलाते देखे गए। स्टाफ होने के कारण उन्हें एक हजार का चालान कटने का कोई ख़ौफ़ नही था। ऐसे पुलिसकर्मियों को पूर्ण विश्वास होता है कि स्टाफ होने के कारण इनका चालान सी पी यू नही काटेगी,
अन्य पुलिस वालों की तो बात छोड़ दो। समाज मे जैसे हर तरह के लोग होते हैं ऐसे ही पुलिस विभाग में भी हर तरह के लोग जहाँ सीपीयू कर्मियों को हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट पहनना, पहनना उनकी आदत में होता हैं। जैसे कि एक होमगार्ड का जवान हेलमेट पहनकर ड्यूटी जाते देखा गया। हरिद्वार में पिछले कई वर्षों से तैनात एक 55 वर्षीय दरोगा को कभी हेलमेट पहनकर बाइक चलाते नही देखा गया। इसके अलावा वो दरोगा सार्वजनिक स्थलों पर दिनभर में 15 से 20 सिगरेट धूम्रपान करते अवश्य दिखाई देता हैं। ऐसे पुलिसकर्मी विभाग की छवि को गन्दा करते हैं। बाइक ही नही अपितु कार चालको को वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना 40 से 60% आम बात है। आम जनता की सीपीयू से अपेक्षा रहती है कि वो जनता के बीच अच्छा सन्देश देने हेतु अपने स्टाफ पुलिसकर्मियों, पत्रकार, नेताओ के चालान काटकर मीडिया से शेयर करे। ताकि आम जनता द्वारा उनके ऊपर पक्षपात का आरोप न लगे। आम जनता का पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि 50 % से ज्यादा उनके स्टाफ वाले बिना लाइसेंस, इंश्योरेंस, गाड़ी के पेपर बिना ही अपना वाहन चलाते हैं। इसकी जांच भी महामहिम राज्यपाल को समय समय पर करानी जरूरी है। अधिकांश पुलिस अधिकारी की दुविधा होती है कि हमे भी समाज मे रहकर अपने फर्ज को अंजाम देना होता है इसलिए चालान काटते समय हर पहलू पर ध्यान देना पड़ता हैं।






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