हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौ० आरिफ) हरिद्वार। वरिष्ठ आरटीआई एवं समाज सेवी अब्दुल सत्तार ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डी०जी ला एंड आडर उत्तराखंड को पत्र प्रेषित किया पत्र मे लिखा गया है, कि उपनगरी ज्वालापुर एक अति संवेदनशील क्षेत्र है, तथा एक बहुत बडी संयुक्त आबादी वाला नगर है, पत्र मे कहाँ गया है, कि उक्त नगरी मे जनहित के लिए निम्न समस्याएं पैदा हो रही है, जिसमे उक्त नगरी के मौहल्ले अहबाबनगर, मैदानियान, पांवधोई, वाल्मिकी बस्ती, पीठ बाजार, कस्साबान, कडच्छ आदि मौहल्लो के गली गली मे नशे का कारोबार चल रहा है, जिसमे शराब, नशे के इंजेक्शन, स्मैक आदि धडल्ले से बिक रहे है, तथा उक्त नगरी के गुरुद्वारा रोड के बाजार एवं लोधामंडी, सुभाष नगर आदि के मेडिकल स्टोर पर नशे की दवाईया आदि धडल्ले से बिक रही है, एवं उक्त नगरी मे स्थित कोतवाली के अधीन स्थित पुलिस चौकियां मात्र 500 मीटर से 01 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है, जो बिल्कुल ही उक्त कोतवाली के समीप ही है, जबकि उक्त नगरी मे सबसे ज्यादा जरूरत उक्त नगरी के ईदगाह रोड एवं अहबाबनगर आदि मौहल्लो मे नई पुलिस चौकियां स्थापित करने की जरूरत, उक्त नगरी मे स्थित कोतवाली मे पुलिस बल बढाने की आवश्यकता है, पुलिस कर्मी कम होने के कारण समय पर कार्यवाही नही हो पाती है, उक्त नगरी की कोतवाली मे तैनात कुछ पुलिसकर्मी कई कई वर्षो से तैनात है, समाज मे ऐसी अफवाह है, कि कई कई सालो से तैनात पुलिस की साठगांठ नशा कारोबारियो से है, उक्त नगरी मे जगह जगह बिक रहे नशे से सरकार के आबकारी विभाग को भी हानि पहुँच रही है, क्यो नशा खोरी करने वाले लोगो को नशा अवैध तरीके से उक्त नगरी मे ही मिल रहा है, जबकि सरकार द्वारा नियमानुसार ठेको के लाईसेंस दिये गये है, नशा करने वाले उक्त ठेको से नशा नही खरीद रहे है, जिससे सरकार को हानि पहुँच रही है, पूर्व मे भी उक्त नगरी की कोतवाली मे तैनात पुलिस कर्मियो एवं नशे के कारोबार के बारे प्रा०पत्र सम्बंधित को प्रेषित किये जा चुके है, लेकिन जाँच मे  क्षेत्राधिकारी सदर द्वारा शब्दो को घुमाकर प्रार्थना पत्र का निस्तारण कर दिया जाता है, और पूर्व मे दिये गये प्रा०पत्रो की जाँच आख्यां मे क्षेत्राधिकारी सदर द्वारा लिख दिया जाता है, कि प्रेषित प्रा०पत्र द्वेष भावना मे दिया गया है, बताये एक समाजसेवी व्यक्ति का पुलिस या नशा कारोबारियो से किस बात का द्वेष हो सकता है, प्रेषित पूर्व पत्र मे यदि समाजहित की बात की गई है, तो द्वेष कैसा इससे ये साबित हो रहा है, कि पुलिस भी दबाव मे कार्य करती है, और महज कागजो की खानापूर्ति कर रही है, और करती रहेगी, पत्र मे वरिष्ठ आरटीआई और समाजसेवी ने कहाँ कि उक्त नगरी मे स्थित कोतवाली मे पुलिस बल कम होने के कारण तथा काफी काफी समय से कुछ पुलिस के तैनात रहने के कारण उक्त नगरी मे नशे का कारोबार बढ रहा है, तथा समय समय पर मजबूत कार्यवाही नही हो पा रही है, मजबूत कार्य वाही ना होने कारण नशे का कारोबार उक्त नगरी मे जडे जमा रहा है, जिसके कारण भारत का भविष्य और नौजवानी बर्बादी की तरफ जा रही है, अब शासन प्रशासन के हाथ मे है, कि समाज मे फैल रही बुराई को रोकना चाहे तो रोके बढवाना चाहे तो बढवाये, समाज के सम्मानित और इज्जतदार शहरी का तो केवल इतना कार्य है, कि समाज मे फैल रही बुराई की सूचना शासन प्रशासन तक पहुँचाये, सम्मानित समाज केवल लोगो को अच्छे और बुरे कार्य के लिए समझा सकता है, और नियमानुसार कार्यवाही तो शासन प्रशासन को ही करनी पडेगी, जिसे शासन प्रशासन करना नही चाहता है, प्रेषित पत्र मे उक्त कहाँ गया है, कि शासन प्रशासन उक्त तथ्यो पर यदि कार्यवाही करना अच्छा समझे तो करके भारत की नौजवानी और भविष्य का भला कर सकते है, और यदि नही करना चाहते है, तो सम्बंधित विभागो के जाँच अधिकारियों द्वारा तथ्यो पर द्वेष भावना से प्रा०पत्र दिया गया है, आख्यां लगवाकर प्रेषित प्रा०पत्र का निस्तारण कर कागजी खानापूर्ति कर सकते है, उक्त प्रेषित पत्र की एक एक प्रति जिलाधिकारी महोदय, पुलिस कप्तान क्षेत्रा धिकारी सदर हरिद्वार को भी प्रेषित की गई है, आपको बताते चले की अब्दुल सत्तार कई वर्षो से आरटीआई और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप मे समाज की सेवा कर रहे है, तथा गरीब बच्चो की शिक्षा के लिए भी एक स्कूल खोल रखा है, जिसमे मौहल्ले के ही गरीब बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे है।
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