हरिद्वार की गूंज (24*7)
(अब्दुल सत्तार) हरिद्वार। उपनगरी ज्वालापुर मे धडल्ले से चल रहे नशे के अवैध कारोबार से बिक रहे नशे का फायदा किसको हो रहा है, और नुकसान किसको हो रहा है, सम्मानित समाज से कोई इस बात का आकलन कर सकता है, मेरे अपना आकलन यह है, कि उपनगरी ज्वालापुर मे बडे स्तर पर जो नशे का कारोबार संचालित है, इस नशे के कारोबार मे सबसे पहले तो उन नशे के कारोबारियों को ही फायदा हो रहा है, दूसरे नम्बर पर उन राजनीतिक लोगो का जिनके इशारे पर ये नशे का कारोबार चल रहा है, तीसरा नम्बर पर शासन प्रशासन के उन लोगो का जो छापामारी और कानूनी कार्यवाही से नशा कारोबारियो को बचाते है, और उपनगरी मे फैले इस नशे के जहर से सबसे पहले समाज के नौजवानों और भविष्य को नुकसान पहुँच रहा है, इस नशे से नश्ले तबाह हो रही है, नश्लो की नसों मे नशे का जहर घुल रहा है, दूसरा सबसे बडा नुकसान सरकार को है, सरकार के आबकारी विभाग द्वारा शराब के लिए जो ठेके अधिकृत किये जाते है, उन पर से लोग खरीदने नही जाते है, वो मौहल्लो मे नशे के ठिकानों से ही खरीद लेते है, तो नशे के अवैध कारोबार से सरकार को भी पलीता लग रहा है, सरकार द्वारा अधिकृत ठेको तक तो बात कुछ हद तक सही थी, लेकिन मौहल्लो और गलियों मे नशे का कारोबार चलने ये समाज के लिए बडी शर्म की बात है, आज नशा हमारे घरो के आस पास बिक रहा है, और मिल रहा है, लेकिन सम्मानित समाज नशे का विरोध करने मे और जवानी के अंदर घुलते जहर के खिलाफ आवाज उठाना नही चाह रहा है, आखिर सम्मानित समाज को क्या हो गया है, शासन प्रशासन मे बैठे लोग नशे के खिलाफ सख्त कार्यवाही नही कर सकते है, उसका कारण है, शासन प्रशासन के कुछ लोगो पर नशा कारोबारी दयावान बने बैठे है, समाज और भारत के भविष्य के अंदर घुलते इस जहर को तो आप और हम ही मिलकर समाप्त कर सकते है, बस जरूरत है, तो केवल हौशले की हमे और आपको केवल और केवल हौशला करके नशे के विरोध मे खडा होना है, अगर आज हम नशे के खिलाफ खडे नही हुए, तो आने वाले कल मे हमारी नश्लो हमे बुरा कहेगी, और मरने के बाद खुदा के दरबार मे भी पेशी होगी की हराम किये गये नशे के खिलाफ आपने आवाज क्यो नही उठाई, बच्चो का बचपना, जवानो की जवानी नशे मे बर्बाद हो रही थी, आप और हम तमाशगीन बने हुए है, तो नशे की तबाही से अपने बच्चो को और देश की जवानी और भविष्य को बचाओ, अपनी आवाज को नशे के खिलाफ उठाओ, इंशाअल्लाह मदद आयेगी, और एक दिन ऐसा आयेगा, जो नशा बिल्कुल समाप्त हो जायेगा, यह सभी बाते प्रसिद्ध समाजसेवी नवाब भारती ने कही और साथ ही साथ नवाब भारती ने कहाँ कि 27 अगस्त को नशे के खिलाफ कुछ राजनीतिक आत्मा अपना वजूद बचाने सडको पर उतरी थी, वो भी खुले तौर पर नही छिपे तौर पर।
Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours