हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। उत्तराखंड के धर्मनगरी हरिद्वार से 28 जून को शुरू हुई 'अखिल भारतीय चमार रेजिमेंट बहाल संघर्ष समिति' की पदयात्रा सोमवार को नई दिल्ली पहुँची। जहाँ पर जल्दी ही देश के सभी सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्म अमर कहानी रविदास जी की के प्रोड्यूसर परमानंद पोपली ने पीताम्बरी पहनाकर समिति के अध्यक्ष महात्मा ज्ञानदास का स्वागत किया। 
समिति की ओर से भी परमानन्द पोपली का पीताम्बरी पहनाकर उनके सहयोग हेतु आभार प्रकट किया। समिति के अध्यक्ष महात्मा ज्ञानदास ने बताया कि 1 मार्च 1943 को अंग्रेजों द्वारा अनुसूचित जाति/ जनजाति, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यको की 1108 उपजातियों को शामिल करके चमार रेजिमेंट की स्थापना की थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भारत के नागालैंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में महापराक्रमी चमार रेजिमेंट को लगाया गया था। चमार रेजिमेंट ने वीरता से लड़ते हुवे सात हजार जापानी सैनिको को मौत के घाट उतारा था। जिसमे चामर रेजिमेंट के 917 वीर बहादुर सैनिक भी शहीद हुवे थे। जापानी सेना 31 मई 1944 को रात में 3 बजे अपने साथियों की लाशें और हथियार छोड़कर चमार रेजिमेंट से डरकर भागने को मजबूर हुई। चमार रेजिमेंट द्वारा बर्मा और रंगून पर भी जीत की पताका फहराने में सफलता प्राप्त की, चमार रेजिमेंट को द्वितीय विश्व युद्ध मे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार बैटल ऑनर ऑफ कोहिमा से सम्मानित किया गया। 1946 में अंग्रेजो ने चामर रेजिमेंट को आजाद हिंद फौज से लड़ने को बाध्य किया गया। मगर देश प्रेम से ओत प्रोत चामर रेजिमेंट ने लड़ने से मना कर दिया। जिस पर अंग्रेजों ने चमार रेजिमेंट को भंग कर विद्रोही घोषित किया। तत्कालीन डिफेन्स एडवाइज़री कमेटी ने भी जिसमे प्रतिनिधित्व भी शामिल था, ने जातिय कारणों से इस बहादुर रेजिमेंट की बहाली का प्रयास नही किया। देश की आजादी के बाद भी चमार रेजिमेंट को इतिहास में स्थान नही दिया गया। इस अवसर पर मांग की गयी कि जिस प्रकार अन्य जातियों के नाम से देश की सेना में रेजिमेंट हैं, उसी प्रकार चमार रेजिमेंट को बहाल किया जाय। उन्होंने बताया कि चमार रेजिमेंट की बहाली के लिये उत्तराखंड के गुरू रविदास मंदिर हरिद्वार से 28 जून को एक पदयात्रा प्रारंभ होकर दिल्ली के जंतर मंतर पर समाप्ति हुई। यहाँ चमार रेजिमेंट की बहाली हेतु धरना दिया गया। उन्होंने यहाँ शक्ति प्रदर्शन करने के बाद राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपा।जिसमें देश के विभिन्न राज्यो से आये लोगो ने अपना समर्थन दिया। इस अवसर पर महासचिव रामकुमार असनावडे, विक्रम रविदासिया, रेणु किशोर झारखंड, मित्रसेन रविदासी, मनोरंजन राठी, अमित जस्सी पंजाबी, ओमकार सिंह, विकास कुमार, महात्मा ब्रिजेशदास, गंगा प्रसाद नेपाल, डॉक्टर जयराजु आंध्रप्रदेश, प्रमोद तेलंगाना, जनार्धनराम बिहार, पी. सी चौधरी मध्यप्रदेश, नरेंद्र पश्चिम बंगाल, अनिल राँची, भीमशंकर कर्नाटक सहित भारी संख्या में देश भर से आये लोगों ने अपना सर्मथन दिया।
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