हरिद्वार की गूंज (24*7)
डबल लाइन में आते लक्सर की ओर से कावड़ियों के वाहन

(गगन शर्मा) हरिद्वार। जिस प्रकार से लक्सर रोड पर कावड़ियों का जनसैलाब आया उसके कारण सारी यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गयी। एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में सरकारी यात्री बस, कावड़ियों के ट्रक सभी प्रकार के चार पहिये वाहन जाम में फस गए।लक्सर रोड वैसे पर्याप्त मात्रा में चौड़ी है मगर जब 4-5 ट्रक, बस, टेम्पो एक साथ चार चार लाईन बनाकर चलेंगे, तो जाम लगना स्वभाविक हैं। जिसके कारण दो पहिये वाहन बाइक, स्कूटी आदि को गांव में खेतो के रास्ते से कही कीचड़ में से तो कही नाले के किनारे किनारे गिरते पड़ते हरिद्वार पहुचने की होड़ लगी थी, 
स्थानिय ग्रामीणों ने सिंगल लाइन में किय कावड़ियों के वाहन

जब यह बात स्थानीय ग्रामीणों के जिम्मेदार लोगों जैसे कि ग्राम प्रधान नूतन कुमार और सांसद प्रतिनिधि धर्मेन्द्र चौहान के दिमाक में आई तो उन्होंने स्थानीय युवाओ की मदद से तय किया कि यदि ये कावंड़ वाहन यू ही चार चार लाइन में चलेगे तो हरिद्वार तक पहुँचना मुश्किल हो जायेगा। तो उन्होंने तय किया कि चाहे कुछ भी करना पड़े, कटारपुर चौक से आगे कोई भी वाहन एक लाइन के बिना नही जायेंगे। दिल को ठंडक देने वाली बात ये रही कि हिन्दू समुदाय से ही नही अपितु मुस्लिम से अकरम जैसे अन्य युवको ने भी यातायात व्यवस्था बनाने में कोई कमी नही छोड़ी। यही ही नही स्वराज नामक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से विकास कुमार ने पत्रकारिता को भुला कर यातायात व्यवस्था सही करने में लग गए। उसका परिणाम ये रहा कि कटारपुर तक तो कावड़ियों और अन्य वाहन 3 से 4 लाइन बनाकर इकट्ठे रेग रेग कर चल रहे थे, मगर कटारपुर चौक पर स्थानीय युवको की मेहनत के कारण कावड़ियों के वाहन तेजी से आगे बढ़ रहे थे। हरियाणा रोडवेज के ड्राइवर ने गैर जिम्मेदाराना तरीके से बस चलाते हुवे अलग लाइन में चलने की आदत नही छोड़ी। जो कि हरियाणा रोडवेज की गलत छवि बना रहा था। स्थानीय लोगो ने चोटिल कावड़ियों की सेवा में अपने स्तर पर कोई कमी नही छोड़ी। जियापोता गांव में कुछ कावड़िये गम्भीर रुप से घायल थे उन्हें स्थानीय महिलाओं ने पानी पिलाकर मदद की। ग्राम प्रधान नूतन कुमार का कहना था सिंगल लाइन में किये बिना कावड़ियो को हरिद्वार पहुँचने में काफी समय लगता। साथ ही हमारा प्रयास था कि यदि कोई आपातकालीन एम्बुलेंस किसी मरीज को लेकर जा रही हो तो उसको अस्पताल जाने में असुविधा न हो। कुछ भी कहो लेकिन जिस प्रकार से कटारपुर चौक पर स्थानीय ग्रामीणों ने यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से चलाकर पुलिस को आइना दिखाया वो शत प्रतिशत तारीफे काबिल रहा। उसकी जितनी तारीफ की जाय कम होगी।

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