हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। प्रतिवर्ष सैकड़ो जिगर के टुकड़े विभिन्न वहानो व नदियों में डूबकर अपनी जान गवा देते हैं। एक कहावत है कि तैरने वाला ही डूबता है, जो तैरना नही जानता वो तो खुद ही पानी से दूर रहता है। अक्सर मीडिया के माध्यम से जब पता चलता है कि कॉलेज के छात्र पिकनिक मनाने गए छात्र डूबकर मर गए। तो हर किसी को बड़ा दुख होता है। होनी तो होके रहे, अनहोनी न होय, अभिभावकों की ये नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वो अपने अपने बच्चों पर निगाह रखे। पुलिस प्रशासन को भी चाहिए कि वो प्रमुख घाट और पुलो पर जागरूकता हेतु बोर्ड लगाये। ताकि किसी हद तक अकाल मृत्यु को रोका जा सके। इस विषय मे रेल चौकी पुलिस इंचार्ज अनिल रतूड़ी ने कहा कि गंगा घाटो पर किसी के डूबने जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने हेतु वो स्वयं औऱ उनकी चेतक टीम निरन्तर गस्त पर रहती है। जो कि घाटों पर संदिग्ध और आपराधिक घटनाओं पर रोकथाम हेतु सक्रिय रहते हैं।
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