हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौहम्मद आरिफ) हरिद्वार। पंचायती अखाड़ा निर्मला के महंत संतोख सिंह मैम्बर जर्नल कमेटी द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि पंचायती अखाड़ा निर्मला की गांव इक्कड कलांं शाखा में अखाड़े के महंतों, निर्मल भेख के पदाधिकारी बुधवार को मीटिंग आयोजित की गई। जिसमें दो वर्षों से चले आ रहे वाद विवाद को समाप्त करने के लिए विचार किया गया। मीटिंग में स्वामी जी की ओर से विवाद को सुलझाने के लिए दोनों महंत गुटों से अलग-अलग बातचीत की गई। लेकिन देर रात तक कोई भी हल नहीं निकल सका, जिसके उपरांत निर्मल अखाड़े के मुखिया महंत रेशम सिंह भूरी वाले की अध्यक्षता में मीटिंग हुई। जिसमें सर्व भारत निर्मल महामंडल के सचिव महंत हाकम सिंह ने एसपी देहात नवनीत सिंह भुल्लर पथरी थाना अध्यक्ष गोविंद कुमार का पुलिस बल तैनात कर लॉ एंड ऑर्डर को कायम रखने के लिए धन्यवाद दिया तथा अखाड़े के वाद विवाद के लिए महंत ज्ञानदेव सिंह को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि महंत ज्ञानदेव सिंह ने अखाड़े के संविधान तथा परंम्परा का उल्लंघन करते हुए कार्यकारिणी के सचिव व कोठारी को गलत एवं गैर कानूनी ढंग से अपनी तानाशाही का शिकार बनाया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1113 से 2012 तक संविधान के मुताबिक जनरल बॉडी की कोई मीटिंग ही नहीं कराई तथा ना नहीं अखाड़े की जमीन जायदाद की आमदनी का कोई ब्योरा दिया। जनरल बॉडी को भी अखाड़े की तरफ से बेची जा रही जमीन आदि के बारे में कुछ भी नहीं बताया जा रहा है। इसलिए उन्होंने मांग की कि जनरल बॉडी की मीटिंग बुलाने मैम्बरो को नोटिस भेजे जाएं तथा रजिस्टर सोसाइटी हरिद्वार को भी अखाड़े के पदाधिकारियों व सदस्यों के चुनाव कराने के लिए कहा गया। असल में महंत बलवंत सिंह तथा महंत ज्ञानदेव सिंह ने अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए अखाड़े की जमीन, जायदाद की आमदनी को खुर्द बुर्द किया तथा जिसका हिसाब नहीं देना चाहते है। इसके उलट अखाड़े की जमीन पर भूमाफियाओं की तरफ से जमीन जायदाद पर कब्जा करने व खुर्द बर्द करने के आरोप लगाकर स्थानीय प्रशासन, अखाड़े के महंत तथा पदाधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं। सविधान के मुताबिक निर्मल भेख की जनरल कमेटी ने दोषों के आधार पर कार्रवाई करते हुये सुनवाई का मौका देने के बाद 26/10/2017 को महंत ज्ञानदेव सिंह को उसके अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। जिसके विरुद्ध उसने कोई भी अदालती कार्यवाही नहीं की तथा ना ही प्रस्ताव रद्द हुआ है। इसलिए महंत ज्ञानदेव सिंह इस समय अखाड़े के अध्यक्ष नहीं है तथा उन्होंने अखाड़े पर नाजायज कब्जा कर गलत व मनचाहे वास्तव पास कर रहे हैं। इसलिए दिनांक 26/10/ 2017 के बाद महंत ज्ञानदेव सिंह द्वारा अध्यक्ष की हैसियत से पारित किए गए प्रस्ताव को रद्द तथा उन्हें गैरकानूनी व अवैध घोषित करने के लिए महंत रेशम सिंह व महंत भूपेंद्र सिंह ने महंत ज्ञानदेव सिंह के विरुद्ध अदालती केस हरिद्वार में दायर किया हुआ है। उन्होंने बताया कि महंत ज्ञानदेव सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान कई शहरों में अखाड़े की भूमि जायदाद कम कीमत पर बेचकर व पटटे पर देकर भूमि को खुर्द बुर्द किया तथा आमदनी राशि का गबन किया है। इस संबंध में निर्मल भेख ने एक सूची तैयार की है। यह भी बताया गया कि महंत ज्ञानदेव सिंह, महंत बलवंत सिंह, महंत बुद्ध सिंह, महंत जसवीर सिंह, महंत बाबू सिंह आदि ने अखाड़े की कुरुक्षेत्र में स्थिति 5 एकड़ भूमि मार्केट रेट पर बेचकर सरकारी रेट पर रजिस्ट्री करके 13 से 20 करोड़ का गबन किया है तथा खरीदारों से भी धोखा किया है। इस घटना के बारे में कुरुक्षेत्र में मुकदमा न०57 दिनांक 24/1/2011 को धारा 420,468,120बी, 467,406 आईपीसी हुआ हैं तथा महंतों की जमानत भी सेंशन र्कोट ने रदद कर दी है। बताया गया है कि इक्कड कला में महंत प्रेम सिंह को निर्मल भेख ने जून 2018 में मुकामी महंत की सेवा सौपी है। जब महंत ज्ञानदेव सिंह प्रधानगी पद पर नहीं थेे। तो महंत प्रेम सिंह पिछले एक साल से इक्कड कला की सेवा कर रहे हैं इनके द्वारा किए गए धार्मिक व सामाजिक कार्यों से क्षेत्रवासी व ग्राम समाज के लोग खुश हैं। तथा महंत ज्ञानदेव सिंह ईर्ष्या, लालच वश होकर इक्कड कला का कब्जा लेना चाहता है। यह बताया गया कि मीटिंग में देर रात सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि प्रशासन को भूमि, जायदाद जो पिछले समय में खुर्द बुर्द की गई है का सही विवरण देखा सही वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाए तथा हरिद्वार में स्थित अखाड़े के पदधिकारियों को महंत ज्ञानदेव सिंह के गलत प्रचार व गुमराह किए जा रहे तथ्यों व महंत ज्ञानदेव सिंह तथा महंत बलवंत सिंह द्वारा संविधान के विपरीत गलत, गैर कानूनी कार्यों की सूची देकर जांच करवाने में सहयोग करें। इसके अलावा फैसला किया गया कि अखाड़े के पूर्व महंत ज्ञानदेव सिंह, सचिव बलवंत सिंह तथा अन्य पदाधिकारियों द्वारा खुर्द बुर्द की गई भूमि व धनराशी के गबन की जांच करने की मांग संबंधी एक विज्ञापन मान्य मुख्यमंत्री व  राज्यपाल उत्तराखंड किया जाए कि वह किसी उच्चस्तरीय अधिकारी द्वारा दो माह में जांच पूरी कर दोषियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही करें। तथा बताया गया कि निर्मल भेख बहुत ही जल्द आम सभा की मीटिंग बुलाकर अखाड़े के अध्यक्ष तथा सचिव की नियुक्ति करके कार्यकारिणी का गठन किया जाए।
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