हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राव ज़ुबैर पुंडीर) भगवानपुर। जनपद हरदोई के टडियावां ब्लाक में इंपैक्ट एवं सर्वोदय आश्रम द्वारा संचालित बालिका शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत भूडपुरवा गांव एवं अन्य 24 गांव में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गांव की महिलाओं को चंदन लगाकर व मिठाई खिलाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर इंपैक्ट की और से प्रोजेक्ट ऑफिसर राव आस्कार अली ने सभी महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि बच्चों में संस्कार भरने का काम मां के रूप में नारी द्वारा ही किया जाता है, यह तो हम सभी बचपन से सुनते चले आ रहे हैं कि बच्चों की प्रथम गुरु मां ही होती है,मां के व्यक्तित्व-कृतित्व का बच्चों पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार का असर पड़ता है। इतिहास उठाकर देखें तो मां पुतलीबाई ने गांधीजी व जीजाबाई ने शिवाजी महाराज में श्रेष्ठ संस्कारों का बीजारोपण किया था। जिसका ही परिणाम है कि शिवाजी महाराज व गांधीजी को हम आज भी उनके श्रेष्ठ कर्मों के कारण आज भी जानते हैं। इनका व्यक्तित्व विराट व अनुपम है। बेहतर संस्कार देकर बच्चे को समाज में उदाहरण बनाना, नारी ही कर सकती है। अत: नारी सम्माननीय है। वैसे भी नारी का सम्मान करना एवं उसके हितों की रक्षा करना हमारे देश की सदियों पुरानी संस्कृति है । यह एक विडम्बना ही है कि भारतीय समाज में नारी की स्थिति अत्यन्त विरोधाभासी रही है । एक तरफ तो उसे शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है तो दूसरी ओर उसे ‘बेचारी अबला’ भी कहा जाता है । इन दोनों ही अतिवादी धारणाओं ने नारी के स्वतन्त्र विकास में बाधा पहुंचाई है । लेकिन इक्कीसवी शताब्दी भारतीय नारी के लिए वरदान सिद्ध हुई हैं। आज की नारी अबला नही सबला बन गई हैं।‘‘ अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आँचल में हैं दूध और आँखों में हैं पानी‘‘ वाली यह गुप्त जी की उक्ति निर्मूल हो चुकी हैं। वह अबलापन की भावनाओं को तिलांजली देकर विकास के सोपान पर अग्रसर हैं। वह किरण बेदी तो कल्पना चावला भी हैं। गोल्ड स्मिथ ने कहा हैं कि‘‘ स्त्री पुरूषों की अपेक्षा अधिक बुद्धिमान होती हैं क्योंकि वह जानती कम और समझती अधिक हैं।‘‘ भारतीय वायु सेना के सबसे बडे जहाज आईपीएल 76 को उड़ाने वाली देश की प्रथम महिला पायलट वीणा सहारण ही हैं। गणतन्त्र दिवस के समारोह के अवसर पर दिल्ली के राजपथ पर आयोजित होने वाली परेड में भारतीय वायु सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली ‘‘स्नेहा‘‘ पहली महिला अधिकारी हैं। मिसाइल मेन एपीजे अब्दूल कलाम की विरासत को आगे बढ़ा रही अग्नि मिसाइल की प्रोजेक्ट डायरेक्टर के सी थॉमस को मिसाइल वुमन और अग्निपुत्री के नाम से गौरवान्वित किया गया हैं। सापर शक्ति तिग्गा भारत में टेरिटोरियल आर्मी की पहली महिला हैं। व्यावसायिक संस्थानो में महिलाऐं रोल मॉडल का कार्य करने के सपनों को साकार कर रही हैं एक सर्वे के अनुसार भारतीय महिलाओं की भागीदारी कुल उद्योगों में दस प्रतिशत हैं और यह भागीदारी निरन्तर गतिशील हो रही हैं। उन्होंने बताया कि बैंकिग, केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, कॉर्पोरेट जगत, स्वयंसेवी संस्थाओं तकनीकी क्षेत्र आदि में दक्षता के साथ महिलाएें आगे बढ रही है, क्योंकि इनकी नेटवर्किग क्षमता सहयोगियों के साथ मधुर व्यवहार, स्थायित्व की मानसिकता, सीखने की जिज्ञासा, परिवर्तनों की बलवती इच्छा, स्वस्थ अभिव्यक्ति सकारात्मक सोच, विनम्रता तथा आगे बढ़ने की उत्कट अभिलाषा आदि क्षमताओं का बाहुल्य हैं। इन्हीं गुणों के कारण प्रत्येक कार्य क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका उपादेय सिद्व हुई हैं।एक सर्वे के अनुसार भारत में कुल 10 लाख से अधिक लघु उद्योग उद्यमशाल महिलाओं द्वारा संचालित हैं। साक्षरता की दृष्टि से भी महिलाओं ने प्रगति की हैं आज केरल में शत प्रतिशत महिलाएं साक्षर हैं। राष्ट्रीय कार्यक्रमों में स्वयं सहायता समूह महिला विकास के लिए वरदान सिद्ध हुए हैं। इन समूहों के द्वारा तकनीकी ज्ञान की प्राप्ति के साथ ही अपने निजी उद्योग स्थापित करने में भी सक्षम बन गई हैं। इस अवसर पर सर्वोदय आश्रम की ओर से ज्ञानेंद्र मिश्रा राममूर्ति अंजू पांडे ममता सर्वेश एवं गांव की महिलाएं उपस्थित रही।
(राव ज़ुबैर पुंडीर) भगवानपुर। जनपद हरदोई के टडियावां ब्लाक में इंपैक्ट एवं सर्वोदय आश्रम द्वारा संचालित बालिका शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत भूडपुरवा गांव एवं अन्य 24 गांव में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गांव की महिलाओं को चंदन लगाकर व मिठाई खिलाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर इंपैक्ट की और से प्रोजेक्ट ऑफिसर राव आस्कार अली ने सभी महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि बच्चों में संस्कार भरने का काम मां के रूप में नारी द्वारा ही किया जाता है, यह तो हम सभी बचपन से सुनते चले आ रहे हैं कि बच्चों की प्रथम गुरु मां ही होती है,मां के व्यक्तित्व-कृतित्व का बच्चों पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार का असर पड़ता है। इतिहास उठाकर देखें तो मां पुतलीबाई ने गांधीजी व जीजाबाई ने शिवाजी महाराज में श्रेष्ठ संस्कारों का बीजारोपण किया था। जिसका ही परिणाम है कि शिवाजी महाराज व गांधीजी को हम आज भी उनके श्रेष्ठ कर्मों के कारण आज भी जानते हैं। इनका व्यक्तित्व विराट व अनुपम है। बेहतर संस्कार देकर बच्चे को समाज में उदाहरण बनाना, नारी ही कर सकती है। अत: नारी सम्माननीय है। वैसे भी नारी का सम्मान करना एवं उसके हितों की रक्षा करना हमारे देश की सदियों पुरानी संस्कृति है । यह एक विडम्बना ही है कि भारतीय समाज में नारी की स्थिति अत्यन्त विरोधाभासी रही है । एक तरफ तो उसे शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है तो दूसरी ओर उसे ‘बेचारी अबला’ भी कहा जाता है । इन दोनों ही अतिवादी धारणाओं ने नारी के स्वतन्त्र विकास में बाधा पहुंचाई है । लेकिन इक्कीसवी शताब्दी भारतीय नारी के लिए वरदान सिद्ध हुई हैं। आज की नारी अबला नही सबला बन गई हैं।‘‘ अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आँचल में हैं दूध और आँखों में हैं पानी‘‘ वाली यह गुप्त जी की उक्ति निर्मूल हो चुकी हैं। वह अबलापन की भावनाओं को तिलांजली देकर विकास के सोपान पर अग्रसर हैं। वह किरण बेदी तो कल्पना चावला भी हैं। गोल्ड स्मिथ ने कहा हैं कि‘‘ स्त्री पुरूषों की अपेक्षा अधिक बुद्धिमान होती हैं क्योंकि वह जानती कम और समझती अधिक हैं।‘‘ भारतीय वायु सेना के सबसे बडे जहाज आईपीएल 76 को उड़ाने वाली देश की प्रथम महिला पायलट वीणा सहारण ही हैं। गणतन्त्र दिवस के समारोह के अवसर पर दिल्ली के राजपथ पर आयोजित होने वाली परेड में भारतीय वायु सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली ‘‘स्नेहा‘‘ पहली महिला अधिकारी हैं। मिसाइल मेन एपीजे अब्दूल कलाम की विरासत को आगे बढ़ा रही अग्नि मिसाइल की प्रोजेक्ट डायरेक्टर के सी थॉमस को मिसाइल वुमन और अग्निपुत्री के नाम से गौरवान्वित किया गया हैं। सापर शक्ति तिग्गा भारत में टेरिटोरियल आर्मी की पहली महिला हैं। व्यावसायिक संस्थानो में महिलाऐं रोल मॉडल का कार्य करने के सपनों को साकार कर रही हैं एक सर्वे के अनुसार भारतीय महिलाओं की भागीदारी कुल उद्योगों में दस प्रतिशत हैं और यह भागीदारी निरन्तर गतिशील हो रही हैं। उन्होंने बताया कि बैंकिग, केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, कॉर्पोरेट जगत, स्वयंसेवी संस्थाओं तकनीकी क्षेत्र आदि में दक्षता के साथ महिलाएें आगे बढ रही है, क्योंकि इनकी नेटवर्किग क्षमता सहयोगियों के साथ मधुर व्यवहार, स्थायित्व की मानसिकता, सीखने की जिज्ञासा, परिवर्तनों की बलवती इच्छा, स्वस्थ अभिव्यक्ति सकारात्मक सोच, विनम्रता तथा आगे बढ़ने की उत्कट अभिलाषा आदि क्षमताओं का बाहुल्य हैं। इन्हीं गुणों के कारण प्रत्येक कार्य क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका उपादेय सिद्व हुई हैं।एक सर्वे के अनुसार भारत में कुल 10 लाख से अधिक लघु उद्योग उद्यमशाल महिलाओं द्वारा संचालित हैं। साक्षरता की दृष्टि से भी महिलाओं ने प्रगति की हैं आज केरल में शत प्रतिशत महिलाएं साक्षर हैं। राष्ट्रीय कार्यक्रमों में स्वयं सहायता समूह महिला विकास के लिए वरदान सिद्ध हुए हैं। इन समूहों के द्वारा तकनीकी ज्ञान की प्राप्ति के साथ ही अपने निजी उद्योग स्थापित करने में भी सक्षम बन गई हैं। इस अवसर पर सर्वोदय आश्रम की ओर से ज्ञानेंद्र मिश्रा राममूर्ति अंजू पांडे ममता सर्वेश एवं गांव की महिलाएं उपस्थित रही।



Post A Comment:
0 comments so far,add yours