हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। भारत वर्ष में महिलाओं का सम्मान सदियों से होता आया है। समय समय पर नारी के कई रूप देखे जाते हैं। आज वाटसअप और फेसबुक के युग मे ही नही अपितु प्राचीन काल मे माता पार्वती ने दुर्गा का रूप धारण कर राक्षको को मारकर देवताओं की रक्षा की थी तो झांसी की रानी ने अंग्रेजो के आगे हथियार डालने की अपेक्षा युद्ध लड़कर अपनी वीरता दिखाई। आज वर्तमान में महिलाएं सभी क्षेत्रों में मर्दों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ दे रही है।
विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए "वुमन्स डे" महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। महिलाओं को यदि अवसर और सम्मान मिले तो वो बहुत कुछ कर गुजरने का जज्बा रखती है। जिस परिवार, समाज और देश मे महिलाओं को सम्मान नही मिलता वहाँ सम्रद्धि नही होती। महिलाओं को शक्ति का रूप यू ही नही कहा जाता है वो वक्त आने पर अपने सुहाग, बच्चों, वतन और फर्ज के लिये बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने से पीछे नही हटती है। आजकल एक विडम्बना भी देखी जाती है कि कुछ पत्नियां चाहती है कि वो अपनी माँ को उनके हाल पर छोड़कर उसके साथ दूर कही अलग रहे। तो ऐसी महिलाओं के साथ भविष्य में उनकी पुत्रवधु भी उसी तरह पेश आती है जैसे वो अपने समय अपनी सास ससुर के साथ पेश आयी थी।
आज जैसा हम बोयगे  समय आने पर वैसे ही फल हमे भोगने पड़ेंगे। महिलाओं के सम्मान की बात करे तो जब तक केंद्र, राज्य सरकार और जिला प्रशासन महिलाओं की सुविधाओं के लिये आवश्यक कदम नहीं उठाता है तब तक उसके द्वारा महिलाओं के सम्मान की बात करना सिर्फ बडी बडी बात जैसा ही है। आज शहरों में बड़े बड़े मॉल तो खुल गए हैं मगर उनमें मुश्किल ही किसी मे मदर फीडिंग के लिये कोई उपयुक्त स्थान होता है। सरकारी विभागों का हाल तो ऐसा है जैसे कि उनके घर मे महिलाये ही नही। ऐसे ऐसे सरकारी कार्यालय देखे गए हैं कि विभाग की हेड महिला फिर भी उनके यहाँ आने वाली महिलाओं के शौचालय पर अक्सर उनके चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी या अन्य विभागीय लोग ताला लगाकर रखते हैं। उस महिला हेड को बताने के बावजूद उसने आवश्यक कार्यवाही करनी जरूरी नही समझी। सर्वप्रथम किसी भी जनपद के आला अधिकारियों एसएसपी या जिलाधिकारी को चाहिए कि उनके जनपद के सार्वजनिक स्थलों और वाहनो में नम्बर लिखे हो जिस पर धूम्रपान करने वाले की शिकायत की जा सके। उसके बाद आवश्यक स्थलों फिर चाहे वो बाजार हो या सरकारी कार्यालय उसमे बेहतर शौचालय की व्यवस्था होनी परम् आवश्यक है। तभी हम महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की सच्ची बधाई देने के पात्र बन पायेगे।
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