हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। आओ कहे हम दिल से रुड़की हो नम्बर 1 फिर से स्वच्छ भारत मिशन में पिछली बार रुड़की को चयनित किया गया था। मगर इस बार लगता है कि नगर निगम रुड़की द्वारा रुचि नही ली, जिसके परिणामस्वरूप नेहरू स्टेडियम रुड़की और सनातन धर्म गर्ल्स इंटर कॉलेज के निकट बनाये गए शौचालय की हालत अत्यंत खराब पायी गई। अच्छी बात कि 2 पुरूष और 2 महिलाओं के लिये अलग अलग शौचालय बनाये गए। मगर उनमें पानी की पर्याप्त व्यवस्था नही पायी गयी। इसी के पास रुड़की के नेहरू स्टेडियम जिसमे खेल प्रतियोगिता और नेताओं का राजनीतिक कार्यक्रम चलना सामान्य बात है। उसके बावजूद उसके दोनों ओर बने शौचालय जिसमे भारत विकास परिषद सम्पर्ण रुड़की द्वारा खिलाड़ियों को समर्पित शौचालय में पानी की न तो महिला शौचालय में न ही पुरूष शौचालय में पानी की कोई व्यवस्था नही पायी गई। उल्टा उसमे सीट जरूर भरी मिली। एक और जब हमारा समाज बेरोजगारी से पीड़ित हैं दूसरी और हम महिलाओं को सम्मान देने की बात करते हो तो ऐसे में किसी भी सभ्य समाज मे उचित स्थानों पर पर्याप्त व्यवस्था सहित शुलभ शौचालय का होना अनिवार्य है। इसके लिये शहर में किसी न किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। अक्सर देखा जाता है कि किसी भी सरकारी विभाग में उसमे कार्यरत उच्च पदाधिकारियों के अपने अटैच वॉशरूम होते हैं जिनमे डेटॉल, तौलिया, खुशबू आदि की समुचित व्यवस्था रखी जाती है। मगर उस विभाग में आने वाली सम्मानित जनता के लिये मुश्किल ही कोई विभाग भारत स्वच्छ अभियान के प्रति गम्भीर देखा गया है। जो कि देश के प्रधानमंत्री मोदीजी को ठेंगा दिखाने वाली बात है। जिम्मेदार अधिकारियों, नेताओ की आवश्यकता और मानसिकता के बदले बिना हमारा समाज एक सभ्य समाज कभी नही बन सकता।
(गगन शर्मा) हरिद्वार। आओ कहे हम दिल से रुड़की हो नम्बर 1 फिर से स्वच्छ भारत मिशन में पिछली बार रुड़की को चयनित किया गया था। मगर इस बार लगता है कि नगर निगम रुड़की द्वारा रुचि नही ली, जिसके परिणामस्वरूप नेहरू स्टेडियम रुड़की और सनातन धर्म गर्ल्स इंटर कॉलेज के निकट बनाये गए शौचालय की हालत अत्यंत खराब पायी गई। अच्छी बात कि 2 पुरूष और 2 महिलाओं के लिये अलग अलग शौचालय बनाये गए। मगर उनमें पानी की पर्याप्त व्यवस्था नही पायी गयी। इसी के पास रुड़की के नेहरू स्टेडियम जिसमे खेल प्रतियोगिता और नेताओं का राजनीतिक कार्यक्रम चलना सामान्य बात है। उसके बावजूद उसके दोनों ओर बने शौचालय जिसमे भारत विकास परिषद सम्पर्ण रुड़की द्वारा खिलाड़ियों को समर्पित शौचालय में पानी की न तो महिला शौचालय में न ही पुरूष शौचालय में पानी की कोई व्यवस्था नही पायी गई। उल्टा उसमे सीट जरूर भरी मिली। एक और जब हमारा समाज बेरोजगारी से पीड़ित हैं दूसरी और हम महिलाओं को सम्मान देने की बात करते हो तो ऐसे में किसी भी सभ्य समाज मे उचित स्थानों पर पर्याप्त व्यवस्था सहित शुलभ शौचालय का होना अनिवार्य है। इसके लिये शहर में किसी न किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। अक्सर देखा जाता है कि किसी भी सरकारी विभाग में उसमे कार्यरत उच्च पदाधिकारियों के अपने अटैच वॉशरूम होते हैं जिनमे डेटॉल, तौलिया, खुशबू आदि की समुचित व्यवस्था रखी जाती है। मगर उस विभाग में आने वाली सम्मानित जनता के लिये मुश्किल ही कोई विभाग भारत स्वच्छ अभियान के प्रति गम्भीर देखा गया है। जो कि देश के प्रधानमंत्री मोदीजी को ठेंगा दिखाने वाली बात है। जिम्मेदार अधिकारियों, नेताओ की आवश्यकता और मानसिकता के बदले बिना हमारा समाज एक सभ्य समाज कभी नही बन सकता।




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