हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मुकेश राणा) हरिद्वार। यह सच है कि पत्रकारिता भारतीय संविधान का चौथा स्तंम्भ है व समाज में अपनी इमानदारी व निर्भीकता के कारण सम्मानित भी है परन्तु कुछ फर्जी वाडें के कारण पत्रकारिता को लेकर काभी परेशानी आईं है इन पर नकेल कसना बेहद आवश्यक हो गया है, यदि समय रहते शासन प्रसाशन ने गौर नहीं किया तो साफ छवि वाले पत्रकारों की छवि धूमिल हो सकती है, अभी हाल ही में कानपुर में एक मामला सुनने में आया है जिसमें खुद को संपादक बताकर लोगो से 10000/ रू यह कह कर लिये गये कि आपको पत्रकार बनाने के साथ ही आपका ऐड भी निकाला जायेगा वह भी टी०वी पर परन्तु जब ऐड नहीं निकला तो बात संदेह में बदलना स्वाभाविक हो गया, बाद में पता चला कि वह सिर्फ यूट्यूब तक सीमित है, जिसकी गोपनीय शिकायत प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को भेज कर कार्यवाही की मांग की गयी है, इसी प्रकार के मामलों का बढ़ना एक आम बात होती नजर आ रही है जिससे सही मायने में पत्रकारिता पर संदेह होना जायज है।
(मुकेश राणा) हरिद्वार। यह सच है कि पत्रकारिता भारतीय संविधान का चौथा स्तंम्भ है व समाज में अपनी इमानदारी व निर्भीकता के कारण सम्मानित भी है परन्तु कुछ फर्जी वाडें के कारण पत्रकारिता को लेकर काभी परेशानी आईं है इन पर नकेल कसना बेहद आवश्यक हो गया है, यदि समय रहते शासन प्रसाशन ने गौर नहीं किया तो साफ छवि वाले पत्रकारों की छवि धूमिल हो सकती है, अभी हाल ही में कानपुर में एक मामला सुनने में आया है जिसमें खुद को संपादक बताकर लोगो से 10000/ रू यह कह कर लिये गये कि आपको पत्रकार बनाने के साथ ही आपका ऐड भी निकाला जायेगा वह भी टी०वी पर परन्तु जब ऐड नहीं निकला तो बात संदेह में बदलना स्वाभाविक हो गया, बाद में पता चला कि वह सिर्फ यूट्यूब तक सीमित है, जिसकी गोपनीय शिकायत प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को भेज कर कार्यवाही की मांग की गयी है, इसी प्रकार के मामलों का बढ़ना एक आम बात होती नजर आ रही है जिससे सही मायने में पत्रकारिता पर संदेह होना जायज है।



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