हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकांत पाठक) हरिद्वार। संघर्षों से कभी नहीं इतिहास हमारा हारा! हुये, वीर बलिदान उन्हे है शत शत नमन हमारा!! भारत मॉ के वीर सपूतों होगा मिलन दोबारा! संघर्षों से कभी नहीं इतिहास हमारा हारा!! उनकी राहों पर हम सबको चलना अब सिखलायेंगें! उनकी गाथा को कल घर घर बच्चे मिलकर गायेंगें!! है पवित्र यह देश हिमालय जैसा मुकुट हमारा! संघर्षों से कभी नहीं इतिहास हमारा हारा!!

रचना बृजेश पाण्डेय दीपगंगा सिडकुल हरिद्वार
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