हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। एक भेंट वार्ता में डॉ महेन्द्र सिंह राणा आरोग्य संस्थान (एम०डी०) ने बताया कि शीतकाल में मनुष्य को प्राकृतिक रूप से ही उत्तम बल प्राप्त होता है प्राकृतिक रूप से बलवान बने मनुष्यों की जठराग्नि सर्दी के कारण शरीर के छिद्रों के संकुचित हो जाने के कारण जठर में सुरक्षित रहती है व इस कारण अधिक प्रबल हो जाती है तथा प्रबल जठराग्नि ठंड के कारण उत्पन्न वायु से और अधिक भड़क उठती है इस भभकती जठराग्नि को यदि आहार रूपी ईधन कम पड़ता है तो शरीर में मौजूद धातुओ को जला देती है अत: शीतकाल में खारे, खट्टे, मीठे, पौष्टिकता से पूर्ण, गुणकारी व्यंजनो का प्रयोग करना चाहिए।
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। एक भेंट वार्ता में डॉ महेन्द्र सिंह राणा आरोग्य संस्थान (एम०डी०) ने बताया कि शीतकाल में मनुष्य को प्राकृतिक रूप से ही उत्तम बल प्राप्त होता है प्राकृतिक रूप से बलवान बने मनुष्यों की जठराग्नि सर्दी के कारण शरीर के छिद्रों के संकुचित हो जाने के कारण जठर में सुरक्षित रहती है व इस कारण अधिक प्रबल हो जाती है तथा प्रबल जठराग्नि ठंड के कारण उत्पन्न वायु से और अधिक भड़क उठती है इस भभकती जठराग्नि को यदि आहार रूपी ईधन कम पड़ता है तो शरीर में मौजूद धातुओ को जला देती है अत: शीतकाल में खारे, खट्टे, मीठे, पौष्टिकता से पूर्ण, गुणकारी व्यंजनो का प्रयोग करना चाहिए।



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