हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। अमर शहीदो तुम्हें नमन है, हुये शहीद वतन के खातिर श्रध्दा सुमन तुम्हें अर्पण है! अमर शहीदो तुम्हें नमन है! भारत में जिस दिन तुम आये सूरज उदय हुआ था! ऩव प्रभात की शुभ बेला का भी अहसास हुआ था!बिछुड़ गये तुम ना भूलेगें कहता अन्तर्मन है! अमर शहीदो तुम्हें नमन है!! जिस दिन माँ की गोदी में उसका बेटा सोया है! भारत को अहसास हुआ कि मैंने कुछ खोया है!! आज भरत हर भारत वासी देश बना उपवन है! अमर शहीदो तुम्हें नमन है! अमर शहीदो तुम्हें नमन है।
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। अमर शहीदो तुम्हें नमन है, हुये शहीद वतन के खातिर श्रध्दा सुमन तुम्हें अर्पण है! अमर शहीदो तुम्हें नमन है! भारत में जिस दिन तुम आये सूरज उदय हुआ था! ऩव प्रभात की शुभ बेला का भी अहसास हुआ था!बिछुड़ गये तुम ना भूलेगें कहता अन्तर्मन है! अमर शहीदो तुम्हें नमन है!! जिस दिन माँ की गोदी में उसका बेटा सोया है! भारत को अहसास हुआ कि मैंने कुछ खोया है!! आज भरत हर भारत वासी देश बना उपवन है! अमर शहीदो तुम्हें नमन है! अमर शहीदो तुम्हें नमन है।



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