हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मनीष लखानी) हरिद्वार। पुलवामा में ही 14 फरवरी यानी गुरुवार को सीआरपीएफ के काफिले पर फिदायीन हमला हुआ था. इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे और कई अन्य घायल हुए थे.दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के पिंगलान इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच रविवार रात से जारी मुठभेड़ में एक मेजर समेत सेना के 4 जवान शहीद हो गए हैं. इस मुठभेड़ में एक आम नागरिक की भी मौत हुई है.यहां दो से तीन आतंकियों के छिपे होने की आशंका है. बताया जा रहा है कि इन आतंकियों में पिछले दिनों सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले में शामिल जैश-ए-मोहम्मद के तीन टॉप कमांडरों को सेना ने घेर लिया है. सुरक्षाबलों ने आसपास के इलाके की घेराबंदी कर सर्च अभियान तेज कर दिया है।

घटना के बाद पुलवामा में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं

बता दें कि 14 फरवरी यानी गुरुवार को पुलवामा में ही सीआरपीएफ के काफिले पर फिदायीन हमला हुआ था. इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे और कई अन्य घायल हुए थे. इस घटना के बाद सेना और सुरक्षाबल एक्शन में हैं.इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है., दो दिन पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ट्विटर पर जानकारी दी थी कि पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस ले लिया गया है और इस फैसले के साथ ही पाकिस्तान से आने वाले सामानों पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया गया है.वहीं दूसरी तरफ सरकार ने जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा भी वापस ले ली है. जिन नेताओं से सुरक्षा वापस ली गई है उनमें मीरवाइज उमर फारूक, शब्बीर शाह, बिलाल लोन, हाशिम कुरैशी, अब्दुल गनी बट और फजल हक कुरैशी शामिल हैं. सरकारी आदेश के मुताबिक रविवार शाम को ही इन नेताओं की सुरक्षा में तैनात जवानों और गाड़ियों को हटा लिया गया हैं।
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