हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकांत पाठक) हरिद्वार। अलौकिक शक्तियों का समावेश कठिन साधना पर निर्भर करता है मनुष्य आधुनिक सुख के संसाधन जुटाने में व्यस्त रहता है लेकिन सुख प्राप्ति का उपाय केवल ईश्वर का स्मरण है दूसरा कोई नहीं क्योकि सुख के साधनों से सुख यदि मिलता तो कोई भी अमीर व्यक्ति दुखी नहीं होता अब समस्या यह है कि हम सुखी क्यों नहीं होते सदैव के लिए सुख कैसे प्राप्त हो सुख का मूल क्या है जब हम दुख में ईश्वर को याद करते हैं तो हमे आन्तरिक सुख ऐवम् शान्ति की अनुभूति होती है, तो सुख का मूल ईश्वर है शान्ति का मूल ईश्वर है अथाह सुखों का भण्डार केवल ईश्वर की उपासना से प्राप्त हो सकता है।
(शिवाकांत पाठक) हरिद्वार। अलौकिक शक्तियों का समावेश कठिन साधना पर निर्भर करता है मनुष्य आधुनिक सुख के संसाधन जुटाने में व्यस्त रहता है लेकिन सुख प्राप्ति का उपाय केवल ईश्वर का स्मरण है दूसरा कोई नहीं क्योकि सुख के साधनों से सुख यदि मिलता तो कोई भी अमीर व्यक्ति दुखी नहीं होता अब समस्या यह है कि हम सुखी क्यों नहीं होते सदैव के लिए सुख कैसे प्राप्त हो सुख का मूल क्या है जब हम दुख में ईश्वर को याद करते हैं तो हमे आन्तरिक सुख ऐवम् शान्ति की अनुभूति होती है, तो सुख का मूल ईश्वर है शान्ति का मूल ईश्वर है अथाह सुखों का भण्डार केवल ईश्वर की उपासना से प्राप्त हो सकता है।



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