हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। हरिद्वार की जनता में भाजपा के सांसदों, विधायको और जिम्मेदार नेताओ के प्रति नाराजगी मेयर चुनाव में सभी ने देखी है। जिसके कारण पूरे हरिद्वार को बड़े बड़े अन्नू कक्कड़ के होर्डिंग से भरने और तरह तरह के हथकंडे दाव पेंच आजमाने के बाद भी हरिद्वार की जनता ने भाजपा के एक बड़े मेट5 के खिलाफ अपना वोट डाला। जिसके लाभ कांग्रेस की अनिता शर्मा को मिला और उसने अन्नू कक्कड़ को अच्छे बड़े अंतर से हराकर भाजपा को हरिद्वार की जनता ने यह सन्देश दिया कि यहाँ की जनता को अपना वोट बैंक समझने की भूल न करे। इस घटना की खबर दिल्ली तक पहुँची थी मगर लगता नहीं कि भाजपा के अमित शाह या उत्तराखंड सहित उन राज्यो के अध्यक्ष 5 राज्यो की हार से कुछ सीखने की चाहत रखते है। हरिद्वार की जनता अतिक्रमण हटाने सड़क चौड़ी करने के हाई कोर्ट के ऑर्डर के नाम पर नाम पर जो दुकाने, घर टूटे उनके लिये भाजपा के आला नेताओ, मंत्रियों से नाराज थे। जनता का कहना था कि जब सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर एससी एस टी को बदला जा सकता है। एक शब्द बदलकर शराब के ठेके को 500 मीटर हटाया2 नही जा सकता सड़को से तो यदि भाजपा के नेता चाहते तो हरीश रावत की तरह गंगा और नहर शब्द से खेलकर व्यापारियों की मदद कर सकती थी। सुनने में आया था कि निकाय चुनाव परिणाम के बाद जिन भाजपा के छोटे बड़े नेताओं ने पार्टी विरोधी कार्य करके पार्टी की हार के कारण बने थे उनके खिलाफ़ अनुशासनहीनता की सज़ा मिलेगी। मगर भाजपा की मीटिंग में 25 दिसम्बर तक चन्दे की एक मोटी रकम इक्कठे करने के कारण अनुशासनहीनता का मामला दब गया लगता है। क्योंकि 25 करोड़ की रकम इकट्ठा करने में अभी तक 12 करोड़ ही इकठ्ठा हुवे है। ऊपर से प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत का यह कहना कि भाजपा का प्रत्येक सदस्य अपनी ओर से भाजपा के लिये उत्तम कार्य कर रहा है, साबित करता है कि चन्दे के कारण अनुशासन हीनता ज्यादा मांयने नही रखती है। शहरी ही नही ग्रामीण क्षेत्रो में भी भाजपा के प्रति काफी रोष देखा जा रहा है। हाल ही में कुछ ग्राम प्रधानों का एक दल कुछ समस्याओ को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से मिलने गया था जहाँ से उन सभी को निराश होकर लौटना पड़ा।
 ग्रामीणों का आरोप है कि विधायको, सांसदों के पास जनता के पास जाकर उनकी समस्याओं उनके दर्द को समझने के लिये समय नही है। इसका एक कारण यह भी देखा जा रहा है कि अपने पिछले अच्छे कार्यो के दम पर कांग्रेस के हरीश रावत को हराने वाले यतीश्वरानंद को उत्तराखंड सरकार में कोई मंत्री पद न मिलना भी बताया जा रहा है। दूसरा कारण भाजपा में पिछले काफी समय से चलती आ रही गुटबाजी भी देखी जा रही है, जिसके कारण अच्छा कार्य करने वाले विधायकों को उचित पद न मिलने के कारण भाजपा के जनप्रतिनिधियो में निराशा का माहौल है। हरिद्वार के अधिकारी हाई कोर्ट के कुछ आदेश को लेकर जो तौड फौड़ कर रही है और किया है जनता को आश थी कि भाजपा के जिम्मेदार नेता समय पर आकर कुछ कानूनी दांव पेंच के माध्यम से बीच का रास्ता निकालते, मगर नेताओ ने उनकी कोई परवाह नही की। ऐसे में भाजपा को लंबे समय से वोट देने वाली जनता कांग्रेस के हरीश रावत से एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाकर पीड़ित जनता को न्याय दिलाने की उम्मीद कर रही है। हरिद्वार के भाजपा नेताओं को दूर दूर तक इस बात से भी कोई मतलब नही कि 2019 में जनता के साथ ऐसी बेरुखी से मोदीजी या भाजपा को कितना बड़ा नुकसान हो सकता है? ऐसे में जरूरी है कि केंद्रीय भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह को चाहिए कि समय रहते हरिद्वार और उत्तराखंड में ऐसे नेताओं, मंत्रियों के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही करे जो स्वार्थ हित मे आकर पार्टी के भविष्य से खेल रहे हैं।
Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours