हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। सात सुख इस पृथ्वी पर हम सभी के लिये होते हैं जिसमें प्रथम सुख निरोगी काया कहा गया यानि की आरोग्यता हमारे लिये सर्व प्रथम आवश्यक होती है यदि हम रोगी है तो जीवन हमारे लिए एक अभिशाप साबित होगा, तो निरोग रहने के लिए हमको क्या करना चाहिए ऋषि चावार्क ने भी लिखा है यावद् जीवेत् सुखम् जीवेत् मतलब जब तक जिओ सुख से जिओ सुख कैसे मिलेगा जब हम निरोग होगें तो निरोग रहने का सफल तरीका क्या है समयानुसार अाहार बिहार हमारी दैनिक दिनचर्या संयमित व नियमित हो, समयानुसार भोजन व नित्य क्रियायें करना व सुबह ऐक लोटा जल पीना रात्रि में भोजन के पश्चात दूध लेना छोटी हरण का सेवन आदि हमको आरोग्यता प्रदान करने में सहायक होता है। तली हुई या जादा चटपटी चीजों से परहेज बेहद जरूरी होता है।
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। सात सुख इस पृथ्वी पर हम सभी के लिये होते हैं जिसमें प्रथम सुख निरोगी काया कहा गया यानि की आरोग्यता हमारे लिये सर्व प्रथम आवश्यक होती है यदि हम रोगी है तो जीवन हमारे लिए एक अभिशाप साबित होगा, तो निरोग रहने के लिए हमको क्या करना चाहिए ऋषि चावार्क ने भी लिखा है यावद् जीवेत् सुखम् जीवेत् मतलब जब तक जिओ सुख से जिओ सुख कैसे मिलेगा जब हम निरोग होगें तो निरोग रहने का सफल तरीका क्या है समयानुसार अाहार बिहार हमारी दैनिक दिनचर्या संयमित व नियमित हो, समयानुसार भोजन व नित्य क्रियायें करना व सुबह ऐक लोटा जल पीना रात्रि में भोजन के पश्चात दूध लेना छोटी हरण का सेवन आदि हमको आरोग्यता प्रदान करने में सहायक होता है। तली हुई या जादा चटपटी चीजों से परहेज बेहद जरूरी होता है।



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