हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। लक्सर रोड पर तहसीलदार सुनैना राणा ने जब एक ओवर लोड स्कूल वैन देखी तो उन्होंने उसे रुकवा कर वाहन चालक को खरीं खोटी सुनाई। इस विषय मे स्कूल संचालक की दलील थी कि आज दूसरे वाहन में खराबी आने के कारण मजबूरन वैन में बच्चे ज्यादा हो गए। अन्यथा स्कूल की ओर से एक नही अपितु अलग अलग रूठ के 4 वाहन लगाए हुवे है। तहसीलदार ने तत्काल कार्यवाही करते हुवे चौकी इंचार्ज तोमर को गाड़ी सीज करने के आदेश दिए। कानून व्यवस्था का मजाक बनाते हुवे एस आई और कॉन्स्टेबल बिना एक भी हेलमेट लगाए कानून को अंजाम देने आये। अच्छा होता यदि तहसीलदार उन दोनों पुलिसकर्मियों का उस मारुति वैन से पहले बिना हेलमेट लगाने के आरोप में चालान काटती तो आज दबंग जिलाधिकारी दीपक रावत की तरह उनकी ओर से समाज मे बहुत ही अच्छा निष्पक्ष कार्यवाही करने का संदेश जाता। सुनैना राणा और दीपक रावत जैसे अधिकारियों पर उस समय पानी फिर जाता हैं जब कानून का उलंघन करने वाले वाहन चालक कुछ आर्थिक दंड के बाद आसानी से छूट जाते हैं। मानते हैं कि गलती इंसान से ही होती हैं मगर कोई भी गलती बार बार इस लिए होती हैं, क्योकि हमारे देश मे क़ानून प्रक्रिया की व्यवस्था लचर हैं। अन्य देश मे वाहन चालक का लाइसेंस रद्द होने में गाड़ी सीज होने में इतनी लम्बी प्रक्रिया से होकर नही गुजरना पड़ता। इसलिये वहाँ यातायात व्यवस्था भारत जैसे देश के लिये मिशाल है। लक्सर रोड पर जगजीतपुर क्षेत्र में भारी संख्या में वाहन अवैध रूप से स्कूली बच्चों को ढोते हैं। सबसे ज्यादा चिंता का विषय कि अभिभावक इस बारे में गम्भीर नही है कि उनके जिगर के टुकड़ो को कैसे लापरवाह वाहन चालक उनकी जान जोखिम में डालकर स्कूल से घर लाते जाते हैं। आरटीओ, तहसीलदार, पुलिस तो कभी कभार ही स्कूली वाहनो को चेक करेगे।
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