हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के मार्गदर्शन में गुजरात के बड़ौदा में 29 दिसम्बर से 3 जनवरी के बीच हो रहे 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के लिए यज्ञ संचालन की 20 सदस्यीय टीम आज रवाना हुई। टीम को गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या एवं संस्था की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी ने मंगल तिलक कर रवाना किया। 1993 में हुए अश्वमेध गायत्री महायज्ञ की रजत जयंती के अवसर पर होने वाले महायज्ञ के संचालन की इस टीम में अध्वर्यु, होता, उद्गाता बंधु आदि शामिल हैं।
इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्या ने कहा कि गायत्री परिवार की संस्थापिका वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा जी की प्रेरणा से 1992 से अश्वमेध गायत्री महायज्ञ का शृंखलाबद्ध कार्यक्रम प्रारंभ हुआ था। इसी क्रम में ९वाँ अश्वमेध महायज्ञ बड़ौदा में 26 नवंबर 1993 को आयोजित हुआ था। उन्होंने कहा कि अश्वमेध करने वाले मेधा और समृद्धि को पाते हैं। वस्तुतः देखा जाये, तो मेधा ही मनुष्य को अभीष्ट है। बुद्धि तो दैवीय अनुदान स्वरूप उसे प्राप्त है, अनेक लोग उस सद्बुद्धि का प्रयोग कर अपना व समाज का उत्थान करने में नियोजित करते हैं। उन्होंने कहा कि अश्वमेध महायज्ञ के आयोजन का उद्देश्य समग्र राष्ट्र को संगठित, सशक्त एवं प्रगतिशील बनाने के लिए होता है और उसकी रजत जयंती उत्सव उत्कृष्ट विचार शक्ति एवं श्रेष्ठ प्रयोजनों के लिए समर्पित लोगों को एकजुट हो, विकास को गति देने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि महायज्ञ के अवसर पर पिछले 25 वर्ष में गुजरात में चल रहे सप्त आंदोलनों की समीक्षा एवं उसमें और अधिक सक्रियता लाने हेतु युवाओं एवं गायत्री परिजनों को संकल्पित कराये जायेंगे। संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने कहा कि सत्कार्य के लिए, शुभ आयोजन के लिए जब समान विचारों की, समान हृदय की आत्माएँ आपस में मिलती हैं, तो वह अश्वमेध यज्ञ समान होता है, जो समाज विकास के लिए आवश्यक है।
यहाँ बताते चलें कि शांतिकुंज के संचालन में अब तक भारत के अलावा इंग्लैण्ड, कनाडा, यूएस, आस्ट्रेलिया, साऊथ अफ्रीका, न्यूजीलैण्ड में भी अश्वमेध गायत्री महायज्ञ का सफल आयोजन हो चुका है। बड़ौदा महायज्ञ के संचालन के लिए शांतिकुंज से गायत्री परिवार प्रमुखद्वय भी जायेंगे। आज रवाना होने वाली टीम में डॉ. गायत्री किशोर त्रिवेदी, उदय किशोर मिश्र, जितेन्द्र मिश्र, अरुण खण्डागले, भूपेन्द्र शर्मा, नरेन्द्र आदि शामिल हैं।
(रजत चौहान) हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के मार्गदर्शन में गुजरात के बड़ौदा में 29 दिसम्बर से 3 जनवरी के बीच हो रहे 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के लिए यज्ञ संचालन की 20 सदस्यीय टीम आज रवाना हुई। टीम को गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या एवं संस्था की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी ने मंगल तिलक कर रवाना किया। 1993 में हुए अश्वमेध गायत्री महायज्ञ की रजत जयंती के अवसर पर होने वाले महायज्ञ के संचालन की इस टीम में अध्वर्यु, होता, उद्गाता बंधु आदि शामिल हैं।
इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्या ने कहा कि गायत्री परिवार की संस्थापिका वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा जी की प्रेरणा से 1992 से अश्वमेध गायत्री महायज्ञ का शृंखलाबद्ध कार्यक्रम प्रारंभ हुआ था। इसी क्रम में ९वाँ अश्वमेध महायज्ञ बड़ौदा में 26 नवंबर 1993 को आयोजित हुआ था। उन्होंने कहा कि अश्वमेध करने वाले मेधा और समृद्धि को पाते हैं। वस्तुतः देखा जाये, तो मेधा ही मनुष्य को अभीष्ट है। बुद्धि तो दैवीय अनुदान स्वरूप उसे प्राप्त है, अनेक लोग उस सद्बुद्धि का प्रयोग कर अपना व समाज का उत्थान करने में नियोजित करते हैं। उन्होंने कहा कि अश्वमेध महायज्ञ के आयोजन का उद्देश्य समग्र राष्ट्र को संगठित, सशक्त एवं प्रगतिशील बनाने के लिए होता है और उसकी रजत जयंती उत्सव उत्कृष्ट विचार शक्ति एवं श्रेष्ठ प्रयोजनों के लिए समर्पित लोगों को एकजुट हो, विकास को गति देने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि महायज्ञ के अवसर पर पिछले 25 वर्ष में गुजरात में चल रहे सप्त आंदोलनों की समीक्षा एवं उसमें और अधिक सक्रियता लाने हेतु युवाओं एवं गायत्री परिजनों को संकल्पित कराये जायेंगे। संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने कहा कि सत्कार्य के लिए, शुभ आयोजन के लिए जब समान विचारों की, समान हृदय की आत्माएँ आपस में मिलती हैं, तो वह अश्वमेध यज्ञ समान होता है, जो समाज विकास के लिए आवश्यक है।
यहाँ बताते चलें कि शांतिकुंज के संचालन में अब तक भारत के अलावा इंग्लैण्ड, कनाडा, यूएस, आस्ट्रेलिया, साऊथ अफ्रीका, न्यूजीलैण्ड में भी अश्वमेध गायत्री महायज्ञ का सफल आयोजन हो चुका है। बड़ौदा महायज्ञ के संचालन के लिए शांतिकुंज से गायत्री परिवार प्रमुखद्वय भी जायेंगे। आज रवाना होने वाली टीम में डॉ. गायत्री किशोर त्रिवेदी, उदय किशोर मिश्र, जितेन्द्र मिश्र, अरुण खण्डागले, भूपेन्द्र शर्मा, नरेन्द्र आदि शामिल हैं।



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