हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। पहाड़ो की रानी मंसूरी के रहने वाले डीएम दीपक रावत देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी एक अनूठी पहचान सोशल मीडिया पर बनाने में कामयाबी हाँसिल कर चुके हैं, साथ ही बच्चों के दिलों में चाचा नेहरू की तरह एक अलग छाप छोड़ी, दीपक रावत जी द्वारा छापेमारी व भृस्टाचारियों के खिलाफ कार्यवाहियों के कारण ये हरिद्वार के सिंघम के नाम से जाने जाते हैं वही अपने जन्म दिन पर इन्होने बड़ा ही महत्वपूर्ण कदम उठाते हुये लोगो को नई सीख दी, अपनी धर्म पत्नी के साथ उत्तरी हरिद्वार के अजरानन्द अंध विध्यालय में छात्रों के साथ भोजन किया यह जन्म दिन हरिद्वार की जनता के लिये एक नसीहत साबित हुआ, इस महत्वपूर्ण कार्य में एसडीएम मनीष सिंह भी साथ रहे, इण्टरब्यू के दौरान एक महाशय द्वारा पूछा गया कि जीरो क्या है तो दीपक रावत ने शान्त लहजे में कहा कि जीरो सबसे पहले हमें यह सिखाता है कि हमें जीवन में न्यूटल रहना चाहिए साथ मल्टीप्लाई करना चाहिए, क्यों कि जीरो को किसी भी अंक में लगाने पर वह दस गुना हो जाता है, व किसी भी अंक में जोड़ने पर उसकी वेल्यू नहीं बदलती, डीएम दीपक रावत कुमाउनी व गढ़वाली गानो को भी बेहद पसंद करते हैं व गुनगुनाते भी देखे गये, ईमानदारी व कड़क छवि के दम पर देश में एक अलग चेहरा बनकर उभरने वाले दीपक जी छापामारी व औचक निरीक्षण के लिए मशहूर हैं वे कब कहाँ पहुच जाये इस बात की कानोकान भी किसी को भनक नहीं लग पाती, इससे पूर्व दीपक रावत नैनीताल में थे 24 घंटे काम करते हुये नैनीताल को सबसे भरोसेमंद व सुरक्षित बनाने में कामयाबी हाँसिल की, कालेकारनामों में लिप्त लोगों के लिए किसी सिंघम से कम नहीं साबित होते हैं डीएम दीपक रावत, मनरेगा घोटाला हो या आरटीओ दफ्तर में हो रही दलाली या फिर भूसे की तरह बच्चों से भरीं स्कूल बसें पलक झपकते ही एक आम आदमी की तरह पहुँच कर सटीक कार्यवाही करने में माहिर हैं दीपक रावत, काश इसी प्रकार के आईएएस अधिकारी उ.ख के प्रत्येक जिले को मिल जाए तो हर जिला अपनी एक अलग पहचान साबित होगा।
Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours