हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। एक और भारत सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हीरो, आई टी सी, जैसी कई प्राइवेट कंपनी भारत स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिय दिन रात लगे हुवे है। तो दूसरी ओर हरिद्वार नगर निगम और हरिद्वार बीएचईएल का जैसे स्वच्छता अभियान में कोई रुचि नही है। दिए तले अँधेरा कहावत को पूरा करते हुवे हर की पौड़ी , श्यामपुर गांव जैसे कई क्षेत्रो में भेल हरिद्वार द्वारा शुलभ शौचालय का निर्माण कराया गया है। यही ही नही उनके भेल परिसर में कई अस्थायी शौचालय सुभाष नगर , टिहरी विस्थापित क्षेत्रो हेतु कई महीनों से खड़े हैं मगर भेल में लगने वाली कई साप्ताहिक पैठ बाजार जिसमे हजारो दुकानदार और हजारो की संख्या में बच्चे, महिलाएं, और पुरूष ख़रीदारी करने आते हैं उन्हें खुले में ही शौच करने को विवश होना पड़ता है। पिछले एक साल से लगातार जिलाधिकारी महोदय, मेयर, और स्थानीय शहरी विकास मंत्री के संज्ञान में मामला देने के बावजूद अभी तक हरिद्वार का सबसे प्रमुख स्थान "रानीपुर मोड़" पर शौचालय की कोई स्थाई या अस्थायी व्यवस्था करने में कोई रुचि नही ली जा रही है। यही हाल  भगत सिंह चौक से शिवालिक नगर चौक तक प्रमुख चौराहों का है जहाँ भेल प्रशासन पीने के पानी और शौचालयो की व्यवस्था करना जरूरी नही समझा रहा है। वो बात अलग है कि जिलाधिकारी द्वारा समय समय पर खुले में शौच करने में आर्थिक दण्ड लगाया गया है। क्या महिलाओं के सम्मान से हरिद्वार निगम और भेल प्रशासन का कोई मतलब नही है? इस बारे में हरिद्वार मेयर में त्वरित कार्यवाही करते हुवे निगम के अधिकारी संजय को अस्थायी शौचालय रखवाने को कहा था मगर 1 माह बीतने के बाद भी जनता और पुलिस वाले खुले में  शौच करने को विवश हैं।
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