हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। कुर्सी खतरे में देख पांच वर्ष बाद आम जनता को याद करने वाले मौका परस्त नेताओं से बचकर खुद में क्रान्ति जगाने का काम करेगी राष्ट्रीय जन क्रान्ति पार्टी, सचिन पिहवाल जिला अध्यक्ष जनतंत्र के नाम पर लोगो के विचारों का फायदा लेने वालों ने कभी यह भी सोचने की जरूरत महशूस की कि आखिर उन्हे अपना मत देने वालों के भी कुछ अरमान होगें कुछ उनके भी अरने सपने होगें जिनका गला घोंट कर अपना उल्लू सीधा करने वाले जनतंत्र के नाम पर कब तक अपना घर भरते रहेगे, पांच वर्ष तक किसी भी मतदाता के घर कोई भी नेता ना तो जाता है ना ही उसकी किसी बात को सुनना चाहता है यूँ समझो कि दूध में मक्खी की तरह महसूस करता है खुद को आज का मतदाता, जिनके मत से विजय पताका फहरा कर आजीवन पेंसन व पाँच वर्ष तक सैलरी पाने का सौभाग्य प्राप्त होता है उनके लिए आज तक किसी भी सरकार या नेताओं ने की क्या सोचा, झोपडी में रहने वाले मतदाता आज भी झोपड़ी में ही जीवन बिता रहे हैं परन्तु उनके मत पाकर सात पीढ़ियों के लिए धन कमाने वालों का क्या यह फर्ज नहीं बनता की गरीब मतदाताओं के दर्द को सुने व उनके लिए भी कुछ सोचें, जब नेताओं की सैलरी व पेंसन हो सकती है तो मतदाता पेंसन प्रस्ताव आज तक अधर में क्यों लटक रहा है? क्यों कि राजतंत्र के बाद आम जनता को बेवकूफ बनाने के तरीके का नाम रखा गया प्रजातंत्र, यदि प्रजातंत्र की मूल विकृतियों को दूर करके वास्तविकता के आइने में देखा जाये तो सही मायने में छलावा दिखाई देता है, प्रजातंत्र यानि जनता का शासन तो फिर जनता की शिकायतों पर ध्यान क्यों नहीं दिया जाता, आज जनता सैकड़ों चक्कर अधिकारियों के आफिसों में लगानें के लिए मजबूर क्यों है, कोई भी विभाग हो क्या जनता से सही व्यवहार किया जाता है? क्यों कि वास्तविकता में इसे जनतंत्र कहना जनतंत्र की तौहीन है कर्ज में डूबी जनता एक ओर फॉसी लगाने को मजबूर है दूसरी ओर नेताओं द्वारा करोंड़ो के घोटाले प्रजातंत्र में चार चांद लगा रहे हैं, श्री पिहवाल ने देश की जनता से राष्ट्रीय जन क्रान्ति पार्टी से जुड़ने व संगठन को मजबूत बनाने की अपील की।
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। कुर्सी खतरे में देख पांच वर्ष बाद आम जनता को याद करने वाले मौका परस्त नेताओं से बचकर खुद में क्रान्ति जगाने का काम करेगी राष्ट्रीय जन क्रान्ति पार्टी, सचिन पिहवाल जिला अध्यक्ष जनतंत्र के नाम पर लोगो के विचारों का फायदा लेने वालों ने कभी यह भी सोचने की जरूरत महशूस की कि आखिर उन्हे अपना मत देने वालों के भी कुछ अरमान होगें कुछ उनके भी अरने सपने होगें जिनका गला घोंट कर अपना उल्लू सीधा करने वाले जनतंत्र के नाम पर कब तक अपना घर भरते रहेगे, पांच वर्ष तक किसी भी मतदाता के घर कोई भी नेता ना तो जाता है ना ही उसकी किसी बात को सुनना चाहता है यूँ समझो कि दूध में मक्खी की तरह महसूस करता है खुद को आज का मतदाता, जिनके मत से विजय पताका फहरा कर आजीवन पेंसन व पाँच वर्ष तक सैलरी पाने का सौभाग्य प्राप्त होता है उनके लिए आज तक किसी भी सरकार या नेताओं ने की क्या सोचा, झोपडी में रहने वाले मतदाता आज भी झोपड़ी में ही जीवन बिता रहे हैं परन्तु उनके मत पाकर सात पीढ़ियों के लिए धन कमाने वालों का क्या यह फर्ज नहीं बनता की गरीब मतदाताओं के दर्द को सुने व उनके लिए भी कुछ सोचें, जब नेताओं की सैलरी व पेंसन हो सकती है तो मतदाता पेंसन प्रस्ताव आज तक अधर में क्यों लटक रहा है? क्यों कि राजतंत्र के बाद आम जनता को बेवकूफ बनाने के तरीके का नाम रखा गया प्रजातंत्र, यदि प्रजातंत्र की मूल विकृतियों को दूर करके वास्तविकता के आइने में देखा जाये तो सही मायने में छलावा दिखाई देता है, प्रजातंत्र यानि जनता का शासन तो फिर जनता की शिकायतों पर ध्यान क्यों नहीं दिया जाता, आज जनता सैकड़ों चक्कर अधिकारियों के आफिसों में लगानें के लिए मजबूर क्यों है, कोई भी विभाग हो क्या जनता से सही व्यवहार किया जाता है? क्यों कि वास्तविकता में इसे जनतंत्र कहना जनतंत्र की तौहीन है कर्ज में डूबी जनता एक ओर फॉसी लगाने को मजबूर है दूसरी ओर नेताओं द्वारा करोंड़ो के घोटाले प्रजातंत्र में चार चांद लगा रहे हैं, श्री पिहवाल ने देश की जनता से राष्ट्रीय जन क्रान्ति पार्टी से जुड़ने व संगठन को मजबूत बनाने की अपील की।



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