हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मनीष लखानी) हरिद्वार। गायत्री विद्यापीठ शांतिकुंज का दो दिवसीय 37वाँ वार्षिकोत्सव का आज सरस्वती वंदना के साथ शुभारंभ हुआ। कक्षा 6 से 12 के बच्चों ने आधुनिक तकनीकि के माध्यम से पानी बचाव, सभ्य भारत-स्वच्छ भारत, वाटर लेबल सेंसर आदि को बड़े ही आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया था। विज्ञान एवं कला प्रदर्शनी का उद्घाटन देव संस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या व विद्यापीठ व्यवस्था मण्डल की वरिष्ठ सदस्या श्रीमती शेफाली पण्ड्या एवं प्रधानाचार्य श्री सीताराम सिन्हा व शांतिकुंज की महिला मण्डल प्रमुख श्रीमती यशोदा शर्मा ने दीप प्रज्वलन कर किया। बच्चों द्वारा लगाये गये प्रर्दशनी ने लोगों को आकर्षित किया।
वार्षिकोत्सव के शुभारंभ अवसर पर देसंविवि के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि बच्चों ने जिस खेल भावना का प्रदर्शन किया है, यह एक अच्छे खिलाड़ी का परिचायक है। उन्होंने कहा कि नौनिहालों ने पर्यावरण संरक्षण, पानी बचाव आदि का जो मॉडल बनाया है, इसे सभी को अपने व्यावहारिक जीवन में अपनाना चाहिए। श्रीमती शेफाली पण्ड्या ने कहा कि हार-जीत खेल का एक अनिवार्य अंग है। जीतने से खुशी होती है, पर अपने साथी की जीत से हमें दोहरी खुशी होनी चाहिए। क्योंकि इससे परस्पर आनंद और उल्लास का जो वातावरण बनता है, उससे हमारी पारिवारिक भावना बढ़ती है।
इस अवसर पर नन्हीं-नन्हीं बालिकाओं ने नृत्य प्रस्तुत कर सभी की खुब वाहवाही लुटी, तो वहीं कक्षा 6 से 12 के छात्र-छात्राओं ने योग के दो दर्जन से अधिक आसनों का प्रदर्शन ने स्वस्थ शरीर के लिए योगासन को अपने दैनिक जीवन के अंग बनाने हेतु प्रेरित किया। श्रीराम हाऊस, भगवती बुलबुल फ्लॉक, सुभाष स्काउट दल, लक्ष्मीबाई एवं सावित्री गाइड कंपनी, स्काउट गाइड जनपद शांतिकुंज आदि की टीमों के विद्यार्थियों ने मार्चपास्ट किया। प्रज्ञेश गढ़वाल एवं टीम द्वारा बनाई गयी जल व पर्यावरण संरक्षण के मॉडल ने दर्शकों को काफी प्रभावित किया। तो वहीं कला शिक्षिका श्रीमती अर्चना गुप्ता के नेतृत्व में नमामि गंगे पर आधारित तैयारी की गयी चित्र प्रदर्शनी ने आकर्षित किया।
प्रधानाचार्य श्री सीताराम सिन्हा ने बताया कि विद्यापीठ के कक्षा-1 से 12 तक कुल एक हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने विभिन्न खेलों में भागीदारी कर रहे हैं। प्रदर्शनी में कक्षा 6 से 12 तक के बच्चों ने विभिन्न मॉडल तैयार किये हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न खेलों के विजेता खिलाड़ियों को शांतिकुंज व देसंविवि के वरिष्ठ पदाधिकारी सम्मानित करेंगे।
(मनीष लखानी) हरिद्वार। गायत्री विद्यापीठ शांतिकुंज का दो दिवसीय 37वाँ वार्षिकोत्सव का आज सरस्वती वंदना के साथ शुभारंभ हुआ। कक्षा 6 से 12 के बच्चों ने आधुनिक तकनीकि के माध्यम से पानी बचाव, सभ्य भारत-स्वच्छ भारत, वाटर लेबल सेंसर आदि को बड़े ही आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया था। विज्ञान एवं कला प्रदर्शनी का उद्घाटन देव संस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या व विद्यापीठ व्यवस्था मण्डल की वरिष्ठ सदस्या श्रीमती शेफाली पण्ड्या एवं प्रधानाचार्य श्री सीताराम सिन्हा व शांतिकुंज की महिला मण्डल प्रमुख श्रीमती यशोदा शर्मा ने दीप प्रज्वलन कर किया। बच्चों द्वारा लगाये गये प्रर्दशनी ने लोगों को आकर्षित किया।
वार्षिकोत्सव के शुभारंभ अवसर पर देसंविवि के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि बच्चों ने जिस खेल भावना का प्रदर्शन किया है, यह एक अच्छे खिलाड़ी का परिचायक है। उन्होंने कहा कि नौनिहालों ने पर्यावरण संरक्षण, पानी बचाव आदि का जो मॉडल बनाया है, इसे सभी को अपने व्यावहारिक जीवन में अपनाना चाहिए। श्रीमती शेफाली पण्ड्या ने कहा कि हार-जीत खेल का एक अनिवार्य अंग है। जीतने से खुशी होती है, पर अपने साथी की जीत से हमें दोहरी खुशी होनी चाहिए। क्योंकि इससे परस्पर आनंद और उल्लास का जो वातावरण बनता है, उससे हमारी पारिवारिक भावना बढ़ती है।
इस अवसर पर नन्हीं-नन्हीं बालिकाओं ने नृत्य प्रस्तुत कर सभी की खुब वाहवाही लुटी, तो वहीं कक्षा 6 से 12 के छात्र-छात्राओं ने योग के दो दर्जन से अधिक आसनों का प्रदर्शन ने स्वस्थ शरीर के लिए योगासन को अपने दैनिक जीवन के अंग बनाने हेतु प्रेरित किया। श्रीराम हाऊस, भगवती बुलबुल फ्लॉक, सुभाष स्काउट दल, लक्ष्मीबाई एवं सावित्री गाइड कंपनी, स्काउट गाइड जनपद शांतिकुंज आदि की टीमों के विद्यार्थियों ने मार्चपास्ट किया। प्रज्ञेश गढ़वाल एवं टीम द्वारा बनाई गयी जल व पर्यावरण संरक्षण के मॉडल ने दर्शकों को काफी प्रभावित किया। तो वहीं कला शिक्षिका श्रीमती अर्चना गुप्ता के नेतृत्व में नमामि गंगे पर आधारित तैयारी की गयी चित्र प्रदर्शनी ने आकर्षित किया।
प्रधानाचार्य श्री सीताराम सिन्हा ने बताया कि विद्यापीठ के कक्षा-1 से 12 तक कुल एक हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने विभिन्न खेलों में भागीदारी कर रहे हैं। प्रदर्शनी में कक्षा 6 से 12 तक के बच्चों ने विभिन्न मॉडल तैयार किये हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न खेलों के विजेता खिलाड़ियों को शांतिकुंज व देसंविवि के वरिष्ठ पदाधिकारी सम्मानित करेंगे।





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