हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। चमत्कारी गुणो का भंडार होता है आक का पौधा इसके गुण व प्रभाव से अनिभिग्य है हर व्यक्ति नवोदय नगर हरिद्वार के डॉ आशीष मिश्रा ने आक के पौधे के गुणो पर प्रकाश डालते हुये बताया कि आक के पत्ते के खुदरे भाग की ओर करके यदि पैर के तलवे में रख कर मोजे पहन लें व सोते समय निकाल दें तो एक सप्ताह में सुगर लेवल सामान्य हो जायेगा, साथ ही बाहर निकला पेट भी कम होगा, आक के पौधे का हर अंग दवा का रूप होता है यह सूर्य के समान तेजस्वी तीक्छण् उत्तम दिव्य रसायन है, इस वनस्पतिक पारद भी कहा जाता है आक के कोमल पत्तों को तेल में हल्की आग से सेंक कर अण्डकोश में बाँधने से सूजन कम होती है, पत्तों का धुआँ बबासीर में फायदा पहुँचाता है, आक के पत्तों को गरम करके बांधने से चोट ठीक हो जाती है व सूजन भी दूर हो जाती है आक की जड़ की राख को कड़आ तेल में मिला कर लगाने से खुजली में लाभ मिलता है डॉ आशीष मिश्रा ने पत्रकार से रूबरू होते हुये बताया कि हमारा शरीर प्रकृत की देन है व प्राकृतिक जड़ी बूटियो के उपयोग से हम असाध्य से असाध्य रोगों को समाप्त कर सकते हैं, श्री मिश्रा ऩे कहा कि समस्त बीमारियाँ पेट से शुरू होती हैं, लीवर हमारे शरीर का प्रमुख अंग है यदि हमारी पाचन क्रिया कमजोर हो जाये तो विभिन्न प्रकार की बीमारियों का हमें शिकार होना पड़ता है इसलिए हमारे खानपान में किन किन चीजों का होना आवस्यक है व क्या चीजें हमें नहीं खाना चाहिये शायद यह जानकारी आम जनता को नहीं होती है इसलिए आज के बच्चे भी गैस (ऐसीडिटी) जैसी बीमारी के शिकार हैं।
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। चमत्कारी गुणो का भंडार होता है आक का पौधा इसके गुण व प्रभाव से अनिभिग्य है हर व्यक्ति नवोदय नगर हरिद्वार के डॉ आशीष मिश्रा ने आक के पौधे के गुणो पर प्रकाश डालते हुये बताया कि आक के पत्ते के खुदरे भाग की ओर करके यदि पैर के तलवे में रख कर मोजे पहन लें व सोते समय निकाल दें तो एक सप्ताह में सुगर लेवल सामान्य हो जायेगा, साथ ही बाहर निकला पेट भी कम होगा, आक के पौधे का हर अंग दवा का रूप होता है यह सूर्य के समान तेजस्वी तीक्छण् उत्तम दिव्य रसायन है, इस वनस्पतिक पारद भी कहा जाता है आक के कोमल पत्तों को तेल में हल्की आग से सेंक कर अण्डकोश में बाँधने से सूजन कम होती है, पत्तों का धुआँ बबासीर में फायदा पहुँचाता है, आक के पत्तों को गरम करके बांधने से चोट ठीक हो जाती है व सूजन भी दूर हो जाती है आक की जड़ की राख को कड़आ तेल में मिला कर लगाने से खुजली में लाभ मिलता है डॉ आशीष मिश्रा ने पत्रकार से रूबरू होते हुये बताया कि हमारा शरीर प्रकृत की देन है व प्राकृतिक जड़ी बूटियो के उपयोग से हम असाध्य से असाध्य रोगों को समाप्त कर सकते हैं, श्री मिश्रा ऩे कहा कि समस्त बीमारियाँ पेट से शुरू होती हैं, लीवर हमारे शरीर का प्रमुख अंग है यदि हमारी पाचन क्रिया कमजोर हो जाये तो विभिन्न प्रकार की बीमारियों का हमें शिकार होना पड़ता है इसलिए हमारे खानपान में किन किन चीजों का होना आवस्यक है व क्या चीजें हमें नहीं खाना चाहिये शायद यह जानकारी आम जनता को नहीं होती है इसलिए आज के बच्चे भी गैस (ऐसीडिटी) जैसी बीमारी के शिकार हैं।



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