हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौ. आरिफ) हरिद्वार। आज के युग में इंसान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए दिन रात इतनी भागदौड़ कर रहा है। कि इंसान अपनों के लिए भी समय नहीं निकाल पा रहा है। इस भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान के आस-पास कुछ ऐसी दुघर्जनाएं घट जाती है। कि उन घटनाओं को देख कर भी इंसान नजरअंदाज कर देता हैं। चाहे वह दुघर्जना इंसान के साथ घटी हो या किसी पशु पक्षी के साथ। लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे भी इंसान हैं। जो दूसरों का दुख देख कर भावुक हो जाते हैं। चाहे वह दुख इंसान का हो। या किसी जानवर का। इसका जीता जागता उदाहरण ज्वालापुर रेलवे ऊंचे पुल का है। जहां एक कुत्ते का छोटा बच्चा घायल अवस्था में तड़प रहा था। नजीवाबाद निवासी ज्वालापुर ऊंचे पुल के पास एक ऑफिस में कार्यकर्त सुभाष कुमार को जब कुत्ते के छोटे बच्चे की आवाज सुनाई दी। उन्होंने देखा कि कुत्ते का छोटा बच्चा घायल है। और जख्मी होने के कारण दर्द में तड़प रहा है। उस छोटे बच्चे को देख कर सुभाष कुमार भावुक हो गए। ओर जानवर के प्रति इंसानियत दिखाते हुए छोटे कुत्ते के बच्चे को हॉस्पिटल ले जाकर डॉक्टरों को दिखा कर उसका इलाज करवाया। उनका यह कार्य प्रशंसनीय तो है ही उन्होंने इंसानियत को भी जिंदा रखे हुए पुण्य का काम किया है। आपको बता दें कि सड़कों पर लावारिस अवस्था में जानवर गाय कुत्ते आदि घूमते हुए देखने को मिलते हैं। जो सड़क दुर्घटना के शिकार हो कर घायल या मर भी जाते हैं। क्या जिस तरह इंसान के साथ दुर्घटना घटने पर इमर्जेंसी में हॉस्पिटल ले जाने की सुविधा होती हैं। जानवरों के लिये ऐसी व्यवस्ता क्यों नहीं। आखिर कार जानवर भी तो इंसान के जीवन का अहम हिस्सा है। आपको यह भी बता दे कि इंसानों की तर्ज पर जानवरों के लिए इमर्जेंसी सुविधा आपको पंतनगर में ही देखने को मिलेगी। जहां दुर्घटना में घायल जानवरों को इमर्जेंसी सुविधा देकर हॉस्पिटलों में ले जाया जाता है। जिससे उनका उपचार और जान बच सके। हरिद्वार जिले में भी शासन प्रशासन को जानवरों के लिए इमर्जेंसी सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए जिससे समय रहते घायल जानवरों का इलाज हो सके और उनकी जान बच सके।
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