हरिद्वार की गूंज
(रजत चौहान) हरिद्वार। समाजसेवा एक ऐसा कार्य है जिससे हमारे मन को शान्ति मिलती है । हम भले ही कितने अमीर क्यों न,व्यस्त क्यों न हों लेकिन जो सुख हमें दूसरों की सेवा या समाज सेवा करने में मिलता है वो सुख सारे सुखों से अलग होता है । क्योंकि हमारे शास्त्रों में भी वर्णित है सेवा परमो धर्मः और अगर यह भावना सभी मानव के दिलों में व्याप्त हो जाय तो मानव जीवन को सार्थकता मिल जाएगी और जरुरतमन्द को जीवन । सेवा के इसी धर्म को भेलकर्मी विवेक सक्सेना जी ने अपने जीवन में शामिल कर लिया है । अपने क्रिया-कलापो को लेकर विवेक सक्सेना जी सोशल मीडिया पर एक सुपरिचित नाम बन गए हैं ।गत वर्षों से कई समाज़ सेवी संस्थाओं व् वरिष्ठ समाज़ सेवियों के साथ जुड़कर उनके द्वारा नित प्रतिदिन निर्धन - असहाय लोगों की सेवा व् निर्धन बच्चों की सेवा के कार्य किये जा रहे हैं।प्रस्तुत है हरिद्वार की गूँज के प्रधान संपादक रजत चौहान की आपसे हुई बिशेष बातचीत का सम्पादित अंश आप भेल महारत्न संस्थान में कार्यरत हैं । इस काम मे कोई कठिनाई का सामना करना पड़ता है? सबसे बड़ी समस्या समय की है ।क्योंकि नौकरी का प्रत्येक दिन का एक नियत समय होता है इस नियत समय को संस्थान को समर्पित करने के उपरान्त ही कुछ अतिरिक्त समाज़ सेवा के लिए किया जा सकता है।पर फिर भी अवकाशों आदि में समाज़ सेवा के लिए समय निकाल लिया जाता है।आज प्रत्येक व्यक्ति अपनी रोज़ मर्रा के जीवन ने पूर्णतः व्यस्त है व् अन्य सांसारिक व पारिवारिक बंधनों से बंधा हुआ है व् कई पारिवारिक मुसीबतों से भी जूझ रहा है परंतु मेरा मानना है कि इन सब के बीच में से निकलकर यदि व्यक्ति भगवान् पर आस्था-विश्वास रखकर व् उनकी भक्ति व् उनका स्मरण करते हुए कुछ जो भी संभव हो किसी निर्धन व् असहाय की मदद करता है व् अन्य को उनकी मदद हेतु प्रेरित करता है तो उसे परम सुख व् शांति की प्राप्ति होती है आप पिछले गत वर्षों से श्री चित्रगुप्त मंडल समिति व् अन्य संस्थाओं के माध्यम से समाज़ में सेवा कार्य कर रहे हैं आप कब से इस से जुड़े और कहाँ से प्रेरणा मिली ? बचपन से लेकर युवावस्था तक जीवन में कई उतार चढ़ावों का सामना करने के उपरान्त भेल में ही कार्यरत अधिकारी सुनील श्रीवास्तव जी ने वर्ष 2015 में मुझे मंडल से जुड़ने के लिए प्रेरित किया व् उन्ही की प्रेरणा व् मार्गदशन से मैं समाज़ सेवा व् निर्धनों की मदद जैसे कार्यों की ओर अग्रसर हुआ। अन्त में आप हमारे पाठकों से कुछ कहना चाहते हैं ? मै बस इतना कहना चाहता हूँ कि सर्वप्रथम ईश्वर की भक्ति पर विश्वास करें उसका स्मरण कर हर अच्छे कार्य जी शुरआत करें हर धर्म, जाति, समुदाय व् अपने से छोटे बड़ों का सम्मान करें व उनके प्रति प्रेम भाव व् सौहाद्र रखे , किसी पर टिप्पणी करने के बजाय खुद कुछ करें और यह जरुरी नहीं है कि कुछ बडा ही काम करना पड़े । आप अपनी स्थिति को देखकर सहयोग में आगे आएं । किसी के चेहरे पर मुस्कान आपकी वजह से आती हैं तो आप वो कीजिए और हँसा नहीं सकते तो रुलाने का भी काम मत कीजिए । सेवा करनी चाहिए इससे आत्मसंतुष्टि मिलती है और आपको लगता है कि आपकी जिन्दगी सार्थक हो गई, सेवा करेंगे तो उस का आनन्द आप को मिलेगा, सेवा ही धर्म है।
(रजत चौहान) हरिद्वार। समाजसेवा एक ऐसा कार्य है जिससे हमारे मन को शान्ति मिलती है । हम भले ही कितने अमीर क्यों न,व्यस्त क्यों न हों लेकिन जो सुख हमें दूसरों की सेवा या समाज सेवा करने में मिलता है वो सुख सारे सुखों से अलग होता है । क्योंकि हमारे शास्त्रों में भी वर्णित है सेवा परमो धर्मः और अगर यह भावना सभी मानव के दिलों में व्याप्त हो जाय तो मानव जीवन को सार्थकता मिल जाएगी और जरुरतमन्द को जीवन । सेवा के इसी धर्म को भेलकर्मी विवेक सक्सेना जी ने अपने जीवन में शामिल कर लिया है । अपने क्रिया-कलापो को लेकर विवेक सक्सेना जी सोशल मीडिया पर एक सुपरिचित नाम बन गए हैं ।गत वर्षों से कई समाज़ सेवी संस्थाओं व् वरिष्ठ समाज़ सेवियों के साथ जुड़कर उनके द्वारा नित प्रतिदिन निर्धन - असहाय लोगों की सेवा व् निर्धन बच्चों की सेवा के कार्य किये जा रहे हैं।प्रस्तुत है हरिद्वार की गूँज के प्रधान संपादक रजत चौहान की आपसे हुई बिशेष बातचीत का सम्पादित अंश आप भेल महारत्न संस्थान में कार्यरत हैं । इस काम मे कोई कठिनाई का सामना करना पड़ता है? सबसे बड़ी समस्या समय की है ।क्योंकि नौकरी का प्रत्येक दिन का एक नियत समय होता है इस नियत समय को संस्थान को समर्पित करने के उपरान्त ही कुछ अतिरिक्त समाज़ सेवा के लिए किया जा सकता है।पर फिर भी अवकाशों आदि में समाज़ सेवा के लिए समय निकाल लिया जाता है।आज प्रत्येक व्यक्ति अपनी रोज़ मर्रा के जीवन ने पूर्णतः व्यस्त है व् अन्य सांसारिक व पारिवारिक बंधनों से बंधा हुआ है व् कई पारिवारिक मुसीबतों से भी जूझ रहा है परंतु मेरा मानना है कि इन सब के बीच में से निकलकर यदि व्यक्ति भगवान् पर आस्था-विश्वास रखकर व् उनकी भक्ति व् उनका स्मरण करते हुए कुछ जो भी संभव हो किसी निर्धन व् असहाय की मदद करता है व् अन्य को उनकी मदद हेतु प्रेरित करता है तो उसे परम सुख व् शांति की प्राप्ति होती है आप पिछले गत वर्षों से श्री चित्रगुप्त मंडल समिति व् अन्य संस्थाओं के माध्यम से समाज़ में सेवा कार्य कर रहे हैं आप कब से इस से जुड़े और कहाँ से प्रेरणा मिली ? बचपन से लेकर युवावस्था तक जीवन में कई उतार चढ़ावों का सामना करने के उपरान्त भेल में ही कार्यरत अधिकारी सुनील श्रीवास्तव जी ने वर्ष 2015 में मुझे मंडल से जुड़ने के लिए प्रेरित किया व् उन्ही की प्रेरणा व् मार्गदशन से मैं समाज़ सेवा व् निर्धनों की मदद जैसे कार्यों की ओर अग्रसर हुआ। अन्त में आप हमारे पाठकों से कुछ कहना चाहते हैं ? मै बस इतना कहना चाहता हूँ कि सर्वप्रथम ईश्वर की भक्ति पर विश्वास करें उसका स्मरण कर हर अच्छे कार्य जी शुरआत करें हर धर्म, जाति, समुदाय व् अपने से छोटे बड़ों का सम्मान करें व उनके प्रति प्रेम भाव व् सौहाद्र रखे , किसी पर टिप्पणी करने के बजाय खुद कुछ करें और यह जरुरी नहीं है कि कुछ बडा ही काम करना पड़े । आप अपनी स्थिति को देखकर सहयोग में आगे आएं । किसी के चेहरे पर मुस्कान आपकी वजह से आती हैं तो आप वो कीजिए और हँसा नहीं सकते तो रुलाने का भी काम मत कीजिए । सेवा करनी चाहिए इससे आत्मसंतुष्टि मिलती है और आपको लगता है कि आपकी जिन्दगी सार्थक हो गई, सेवा करेंगे तो उस का आनन्द आप को मिलेगा, सेवा ही धर्म है।



Post A Comment:
0 comments so far,add yours