हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। द्वारिका प्रसाद के बारे में स्थानीय लोगों को तब पता लगा जब उन्हें भेल में स्थित सेक्टर-2 के एक पार्क में प्रातः काल पौधों का निराई -गुढाई कर उनमें खाद डालते हुए सरंक्षण करते हुए देखा गया। एक लंबे समय से हरिद्वार के विभिन्न क्षेत्रों में पौधारोपण के कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं परंतु प्रायः देखने में आता है कि इन पौधारोपण के उपरान्त उनकी देखभाल व् निरंतर सिंचाई हेतु ध्यान नहीं दिया जाता जिस कारण हरे भरे पर्यावरण हेतु पौधारोपण का उद्देश्य निरर्थक हो जाता है।हरिद्वार की गूंज
के संवाददाता द्वारा द्वारिका जी से जानकारी प्राप्त करने पर पता चला कि उनकी उम्र 70 वर्ष से भी अधिक है ओर वह भेल हरिद्वार से ही वर्ष 2005 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं तथा कई वर्षों से इसी प्रकार प्रातः काल में साइकिल से घूम घूम कर पौधों का सरंक्षण कर रहे हैं जो कि समाज़ व् पर्यावरण हेतु गुप्त सेवा है पौधों को बढ़ता देख जिसने उसे रौपा होता है उसकी चेहरे की ख़ुशी देख कर उन्हें भी ख़ुशी का एहसास होता है।आज द्वारिका जी के इस ज़ज़्बे से अन्य को भी सीख लेनी चाहिए व् पौधारोपण के साथ ही उसके सरंक्षण पर भी ध्यान देना चाहिए।
(रजत चौहान) हरिद्वार। द्वारिका प्रसाद के बारे में स्थानीय लोगों को तब पता लगा जब उन्हें भेल में स्थित सेक्टर-2 के एक पार्क में प्रातः काल पौधों का निराई -गुढाई कर उनमें खाद डालते हुए सरंक्षण करते हुए देखा गया। एक लंबे समय से हरिद्वार के विभिन्न क्षेत्रों में पौधारोपण के कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं परंतु प्रायः देखने में आता है कि इन पौधारोपण के उपरान्त उनकी देखभाल व् निरंतर सिंचाई हेतु ध्यान नहीं दिया जाता जिस कारण हरे भरे पर्यावरण हेतु पौधारोपण का उद्देश्य निरर्थक हो जाता है।हरिद्वार की गूंज



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